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मुंबई पर आतंकवादी हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस समय पाकिस्तान पर जबर्दस्त कूटनीतिक दबाव है, इसके बावजूद पाकिस्तानी राष्ट्रपति का कहना है कि भारत ने उन्हें कोई पुख्ता सबूत नहीं दिए हैं।
उन्होंने यहां तक कहा है कि मुंबई हमले में जो एक आतंकवादी पकड़ा गया है, वह पाकिस्तानी नागरिक ही है इस बात का कोई सबूत नहीं है। जबकि पाकिस्तानी आतंकी अजमल अमीन कसाब, नौ आतंकियों के शव, उनके हथियार, फोन कॉल्स के लोकेशन और डिटेल्स, बोट के जीपीएस सिस्टम में दर्ज कराची के डिटेल्स-इन तमाम चीजों को मानने के लिए पाक तैयार नहीं है। दूसरी ओर बकौल पाकिस्तानी राष्ट्रपति, अगर यह साबित हुआ कि वह पाकिस्तानी है, तो उसके खिलाफ वहां की अदालत में मुकदमा चलाया जाएगा।
इससे पहले जरदारी ने कहा था कि आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई में पाकिस्तान, भारत के साथ पूर्ण सहयोग करेगा और वे आईएसआई के प्रमुख को भारत भेजेंगे, मगर अपनी विदेश नीति के अनुरूप पाकिस्तान तमाम बयानों से मुकरता चला गया। हालांकि इस पूरे मामले पर भारत ने कड़ा रुख अख्तियार किया हुआ है, लेकिन कूटनीतिज्ञों को शक है कि पाकिस्तान दाऊद इब्राहिम को सौंपेगा, क्योंकि यदि पाकिस्तान ने अपने देश में दाऊद की मौजूदगी को स्वीकार कर लिया, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि इस मामले में वह अब तक दुनिया को गुमराह करता रहा है।
दरअसल, दाऊद और उसका नेटवर्क नशीले पदार्थो से लेकर आतंकवाद के खिलाफ एक पुल का काम कर रहा है, इसलिए अमेरिका ने भी वांछित आतंकियों की सूची में दाऊद का नाम अलकायदा के साथ रखा है। जैश-ए-मोहम्मद के मसूद अजहर के बारे में पाकिस्तान का पक्ष है कि जबसे भारत ने कंधार में उसे छोड़ा था, तबसे वह अफगानिस्तान में ही रह रहा है।
13 नवंबर, 2005 को भारत जिन बीस वांछित आतंकवादियों की सूची पाकिस्तान को सौंप चुका है उनके अपने यहां होने की बात को पाकिस्तान सिरे से नकारता है। पूर्व भारतीय विदेशमंत्री यशवंत सिन्हा ने जब इन आतंकवादियों के पाकिस्तान में होने की पुख्ता जानकारी और प्रमाण दिए, तो वहां के विदेशमंत्री और अधिकारी ने इन आतंकवादियों की मौजूदगी को पूरी तरह खारिज कर दिया।
पाकिस्तान के दोमुंहेपन का पता इस बात से भी चलता है कि कुछ दिनों पहले आसिफ अली जरदारी ने अपने बयान में कहा था कि आतंकवाद के खिलाफ वे खुद लश्करे तैयबा से लड़ रहे हैं, जबकि दूसरी ओर इस संगठन के संस्थापक हाफिज मोहम्मद सईद को पाकिस्तान देशभक्त का दर्जा देता है। इन परिस्थितियों में उचित ही भारतीय विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में भारत जो आवश्यक समझेगा वह करने से पीछे नहीं हटेगा।