|
इंदौर. अस्पताल को सरकारी समझकर काम न करें बल्कि अपने घर की तरह यहां सेवाएं दें। सभी विभागों में ओपीडी और सर्जरी का आंकड़ा संतोषप्रद नहीं है। इसमें सुधार लाएं और यदि कोई समस्या आ रही है तो हमें बताएं।
बुधवार को मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव एम.एम. उपाध्याय ने बैठक के दौरान सभी विभागाध्यक्ष को गुणवत्ता सुधारने के लिए कहा। उन्होंने एमवाय अस्पताल में ओपीडी और सर्जरी की घटती संख्या पर आपत्ति जताते हुए काम का ग्रॉफ बढ़ाने को कहा। अस्पताल ऑडिटोरियम में दो घंटे बैठक चली। श्री उपाध्याय ने सभी विभागों से समस्याएं भी पूछीं और डॉक्टरों द्वारा प्रतिमाह किए जाने वाले काम का आकलन किया।
स्त्री एवं प्रसूति और हड्डी रोग विभाग का रिपोर्ट कार्ड सबसे बेहतर था। कैंसर अस्पताल में होने वाली सर्जरी की कम संख्या पर उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई। श्री उपाध्याय ने विभागाध्यक्षों से उनकी समस्याएं भी पूछीं। डॉक्टरों ने कहा काम बढ़ रहा है और संसाधन कम हो रहे हैं। ऑपरेशन थिएटर के नवीनीकरण एवं सुविधाएं दिए जाने की मांग की। डॉक्टरों ने बताया अस्पताल में एनेस्थेस्टिक डॉक्टर कम हैं। इनके पद बढ़ाए जाना चाहिए। एमटीएच स्थित महिला अस्पताल में अल्ट्रोसोनोग्राफी और लेबोरेटरी खोले जाने की मांग रखी गई। केंद्रीयकृत नीति के कारण उपकरण नहीं खरीदे जाने की समस्या भी बताई।
तो तीसरी बार फिर बुलवाएं टेंडर
कॉलेज प्रशासन ने एनओसी मिलने के बाद टेंडर निकालने पर एक ही कंपनी द्वारा आवेदन दिए जाने की समस्या भी उठाई। इस पर श्री उपाध्याय ने कहा कि दो बार यदि एक ही कंपनी का टेंडर आता है तो तीसरी बार फिर टेंडर बुलवाएं और यदि यही स्थिति बनती है तो उसी कंपनी से उपकरण खरीद लें।
सीनियर रेसीडेंस ने दिया ज्ञापन
वेतन बढ़ाए जाने की मांग को लेकर सीनियर रेसीडेंस डॉक्टरों ने प्रमुख सचिव को ज्ञापन सौंपा। डॉ. आनंद राय ने बताया शासन ने जूनियर डॉक्टरों का स्टायपेंड बढ़ाते समय सीनियर रेसीडेंस का वेतन बढ़ाने का वादा किया था लेकिन अभी तक पूरा नहीं किया। टीचिंग फैकल्टी का वेतन भी 20 प्रतिशत बढ़ चुका है। जूनियर डॉक्टरों को अप्रैल 08 से बढ़ा स्टायपेंड मिलने लगा है। डेंटल कॉलेज में इंटर्नशिप कर रहे डॉक्टरों ने भी ज्ञापन सौंपा।