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कहां जाएं, किसे सुनाएं

ग्वालियर. बदनाम हुए तो क्या नाम तो हुआ.. लगता है मप का निजाम इसी अंदाज पर काम कर रहा है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने वर्ष 2007 के क्राइम की जो रिपोर्ट हाल में जारी की है उसमें मप्र को महिलाओं से बलात्कार के मामले में देश में सर्वोच्च स्थान पाया है।

दुर्भाग्य देखिए, पिछले साल भी जो क्राइम रिपोर्ट जारी की गई थी उसमें भी मप्र ही बलात्कार के मामले में अव्वल रहा था। इस साल बलात्कार के मामले 3010 हैं, तो पिछली रिपोर्ट में 2900 थे। छेड़छाड़ के मामले भी मप्र में देश के अन्य प्रदेशों की तुलना में अधिक है। देश में दर्ज छेड़छाड़ के कुल 36617 मामलों में से 6772 मप्र के हैं।

बलात्कार व छेड़छाड़ के बढ़ते ग्राफ को लेकर जब दैनिक भास्कर ने ग्वालियर अंचल में पड़ताल की, तो यह बात निकलकर आई कि अंचल के छह जिलों (ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी व दतिया) में प्रति 27 हजार महिलाओं पर मात्र एक महिला पुलिसकर्मी है। ऐसे में फरियाद लेकर थाने आने वाली महिलाओं को पुरुष प्रधान पुलिस अमला कैसे न्याय की दहलीज तक ले जा पाएगा, कहना बेहद मुश्किल है।

उठते हैं महिलाओं पर सवाल
महिला पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी के चलते जहां महिलाओं को समय से न्याय नहीं मिल पाता, वहीं इन्हें अपने महकमे में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। भिंड जिले में संदिग्ध हालात में आत्महत्या करने वाली सब इंस्पेक्टर चेतना शर्मा का मामला हो या अपनी सहयोगी पुलिस कर्मी के प्यार में फंसे टीआई रमाकांत वाजपेयी की मौत का मामला, इनसे स्पष्ट होता है कि महिला पुलिसकर्मी के लिए विभाग में सब कुछ ठीक-ठीक नहीं है। नाम न छापने की शर्त पर एक महिला पुलिस अधिकारी का कहना था कि आला अफसरों की दरबारी नहीं करने की कई मर्तबा उन्हें कीमत चुकाना पड़ती है।

क्या था चेतना का मामला
भिंड में तैनात सब इंसपेक्टर चेतना शर्मा की 29 व 30 नवम्बर 2006 की दरम्यानी रात पुलिस लाइन स्थित शासकीय क्वार्टर में संदिग्ध परिस्थतियों में गोली लगने से मौत हो गई थी। इस घटना को लेकर चेतना शर्मा के पिता केदार नाथ शर्मा ने भिंड के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक राजाबाबू सिंह के ऊपर घटना में लिप्त होने का आरोप चस्पा किया था। सीआईडी जांच व मानवाधिकार आयोग को लिखे गए कथित पत्र के आधार पर सीआईडी के भोपाल थाने में राजाबाबू सिंह के खिलाफ धारा 306 के तहत प्रकरण भी दर्ज किया गया था। वर्तमान में इस मामले में सीबीआई की जांच विचाराधीन है।

कौन थी कमलेश
भिंड के मालनपुर थाने में तैनात इंसपेक्टर रमाकांत वाजपेयी की जहरीला पदार्थ खाने से 7 मई 2008 को मालनपुर स्थित विश्रामगृह पर मौत हुई। - रमाकांत वाजपेयी की मौत के मामले में यह बात सामने आई थी कि उनके द्वारा भोपाल में पदस्थ प्रधान आरक्षक कमलेश मिश्रा के साथ दूसरी शादी रचाई गई थी। कमलेश मिश्रा ने रमाकांत वाजपेयी से पैसों की मांग की थी, अन्यथा शादी के दस्तावेज सार्वजनिक करने के लिए भी धमकाया था,इसी बात को लेकर श्री वाजपेयी ने खुदकुशी कर ली।

ग्वालियर रेंज में स्वीकृत महिला पुलिस बल के हिसाब से महिला पुलिसकर्मियों की संख्या पूरी है। जितना महिला पुलिस बल मिला है उसको पर्याप्त मानकर काम किया जा रहा है।
- डीएस सेंगर, आईजी ग्वालियर रेंज

इनका कहना है

जोन में उपलब्ध महिला पुलिस बल पर्याप्त है
हम स्वीकृत पद संख्या को पर्याप्त मानते हैं। यहां स्वीकृत पद ही पूरे नहीं भरे गए हैं, इसलिए पर्याप्त बल कैसे कह सकते हैं।
महिला हवालात की स्थिति क्या है
यह सामान्य निर्देश दिए गए हैं किसी भी महिला को ओवरनाइट थाने में न रखा जाए। महिला को उसी दिन अदालत में पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। बकौल श्री कुमार यह उनका व्यक्तिगत मानना है कि बलात्कार के मामले की विवेचना भी महिला अधिकारी ही करे पर ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है।
महिला पुलिस बल बढ़ाने के लिए कोई प्रपोजल है
गत वर्ष महिला पुलिस कर्मियों के पद भरने के प्रयास किए गए थे पर योग्य उम्मीदवार नहीं मिलीं। अगले वर्ष जनवरी में फिर प्रयास किए जाएंगे।
- अरविन्द कुमार,आईजी चंबल

नेक सलाह
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट कहती है कि बलात्कार के अधिकांश मामलों में पाया गया कि पीड़िता आरोपी को पहचानती है। इतना ही नहीं कुछ मामलों में पालक या परिवार का कोई नजदीकी ही बलात्कार का आरोपी पाया गया। महिलाओं को सतर्क रहने की जरूरत है।

क्या ऐसा नहीं हो सकता
मप्र में जिलास्तर पर महिलाओं के मामलों की सुनवाई के लिए परिवार परामर्श केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों में महिलाओं को समझा-बुझाकर घर वापसी या सुलह के लिए प्रोत्साहित किया जाता है लेकिन छेड़छाड़ या बलात्कार के मामलों में इन केंद्रों की कोई भूमिका नहीं है। केरल पुलिस ने दो साल पहले सभी पुलिस थानों में महिलाओं के मामलों पर विशेष ध्यान देने के लिए महिला पुलिस की डेस्क बनाई थी। किसी होटल के रिसेप्शन की तरह तैयार की गई इन हेल्प डेस्क के चलते अपराध की शिकार महिलाएं अपनी बात थानों में खुलकर रखने लगी, जिसके फलस्वरूप वहां महिला अपराधों में कमी आई। सवाल उठता है क्या ऐसा कोई प्रयोग मप्र पुलिस नहीं कर सकती?





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