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मोहल्लों व होटलों पर खुफिया निगाह

ग्वालियर. शहर के कुछ मोहल्ले पुलिस ने चिह्न्ति किए हैं, इन पर पुलिस के अलावा खुफिया एजेंसियां भी निगाह रख रही हैं। इन मोहल्लों में कौन नया आदमी आता-जाता है और यहां रहने वाले लोगों के रोजगार के क्या साधन हैं, इस पर भी निगाह रखी जा रही है।

मुंबई में हुए आतंकवादी हमले के बाद शहर में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। निगाह रखने के लिए एक कार्ययोजना तैयारी की गई है जिसके तहत पुलिस और खुफिया एजेंसियों के लोगों को सक्रिय किया गया है। पुलिस और खुफिया एजेंसियों के लोग शहर के बड़े होटल्स, मॉल्स और बाजारों में तैनात किए गए हैं।

क्या है आने और रहने का उद्देश्य
नई सड़क स्थित संकरी गलियां वाली बृजविहार कॉलोनी में रहने वाले आईएसआई के एजेंट माजिद खान को खुफिया एजेंसी और पुलिस की संयुक्त मुहिम में चार वर्ष पहले पकड़ा गया था। आईएसआई का यह एजेंट कई वषों से यहां रह रहा था और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारत का मूल निवासी भी बन बैठा था।

खुफिया एजेंसियों की निगाह ऐसे ही मोहल्लों पर है जहां पर इस तरह के स्लीपर्स सेल (एजेंट) आसानी से घुलमिल जाएं और मोहल्ले के लोग इन पर शंका भी न कर सकें। इसके अलावा पुलिस की निगाह ऐसे लोगों पर भी है जिनकी नाते-रिश्तेदारी विदेश में हैं और ये रिश्तेदार इनके यहां आते-जाते रहते हैं। यह मालूम किया जा रहा है कि ऐसे लोगों के विदेशी रिश्तेदारों का कारोबार क्या है और इनका भारत आने का मकसद रिश्तेदारों से मिलने के अलावा कुछ और तो नहीं है।

क्या हैं स्लीपर्स सेल
स्लीपर्स सेल ऐसे आईएसआई एजेंट्स को कहा जाता है जो सामान्यत: किसी आतंकवादी घटना से प्रत्यक्ष रूप से तो नहीं जुड़े होते हैं लेकिन आतंकवादियों को लक्ष्य की जानकारी देते हैं तथा इसके अलावा वारदात से पहले स्थानीय स्तर पर उनकी मदद करते हैं।

किराएदारों की जानकारी के लिए मुनादी
शहर के किसी हिस्से में किराएदार बनकर तो कोई असामाजिक तत्व नहीं रह रहा है, यह जानने के लिए पुलिस मकान मालिकों को भी जागृत कर रही है, इसके लिए बाकायदा एक गाड़ी पर माइक लगाकर एनाउंसमेंट भी कराया जा रहा है।





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