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बिकनी की विजय गाथा

परदे के पीछे. dostana फिल्म उद्योग में ड्रेस डिजाइनर मनीष मल्होत्रा को सितारा हैसियत प्राप्त है। मौजूदा दौर में ड्रेस डिजाइनर, डांस मास्टर और एक्शन मास्टर निर्देशक से ज्यादा महत्पूर्ण हो गए हैं। अब बताइए कि फिल्म ‘दोस्ताना’ में प्रियंका चोपड़ा सुनहरे रंग की बिकनी पहनती हैं और इसे फिल्म की सफलता का श्रेय दिया जा रहा है। गोया कि निर्देशक, कैमरामैन और अन्य लोग घास काट रहे थे।

जब बलदेवराज चोपड़ा की फिल्म ‘वक्त’ कामयाब हुई और राजकुमार की भूमिका को सराहा गया तब सनकी राजकुमार ने कहा कि आजकल लोग हमारे जूते की कमाई खा रहे हैं। ज्ञातव्य है कि उस फिल्म में राजकुमार ने सफेद रंग के जूते पहने थे। एक निर्देशक की परिकल्पना को 100 लोग अपनी मेहनत से शक्ल देते हैं और सफलता का श्रेय बिकनी या जूते को दिया जाता है। हमारे देश में सफलता के बाप दस मिल जाते हैं और असफलता हमेशा नाजायज संतान की तरह पितृविहीन रह जाती है। फिल्म उद्योग में लोग यह भूल जाते हैं कि करीना कपूर ने भी फिल्म ‘टशन’ में लघुतम बिकनी पहनी थी और फिल्म ने उतना धन भी नहीं कमाया कि बिकनी भर ही मिल जाती।

आजकल किसी भी नायिका को कथा सुनाने जाएं तो वह पूछती है कि फिल्म में समुद्र तट पर बिकनी पहनने का दृश्य है या नहीं, गोया कि दौड़ लघुतम के लिए हो रही है। सफलता भी कैसा नशा है कि मनुष्य इसके लिए सब कुछ करने को तैयार हो जाता है। कपड़े तो छोड़िए, आत्मसम्मान का भी त्याग कर दिया जाता है। बेचारी प्रियंका चोपड़ा की अपने प्रेमी हरमन बावेजा अभिनीत ‘लव स्टोरी 2050’ असफल रही, ‘द्रोणा’ ने पानी नहीं मांगा और ‘फैशन’ केवल महानगरीय रही है, अत: ‘दोस्ताना’ उनके डूबते करियर में तिनके का सहारा थी।

अब उन्हें जताया जा रहा है कि बेबी तुम नहीं तुम्हारी बिकनी कामयाब रही है। ठीक इसी तरह अनेक असफलताओं के बाद जॉन अब्राहम को ‘दोस्ताना’ में सराहा गया गोया कि लघुतम स्विम सूट के नीचे खिसकने की अदा चल गई। उनके अभिनय या अभिनय की गैरहाजिरी की बात नहीं हो रही है वरन खिसकते हुए स्विम सूट की बात की जा रही है, जबकि कमोबेश ऐसी ही हरकत के बावजूद रणवीर कपूर की ‘सांवरिया’ असफल रही। यह सफलता का गोरखधंधा भी अजीब है, कभी समझ नहीं आता।

फिल्म उद्योग में अशोक कुमार अभिनीत ‘संग्राम’ में नलिनी जयवंत ने बिकनी पहनी थी और संजीदा नूतन ने भी ‘दिल्ली का ठग’ में यही साहस दिखाया था। बेगमपारा जिन्होंने बाद में दिलीप कुमार के भाई नसीर से शादी की थी, फिल्म उद्योग की पहली बिकनी धारिणी थीं। वैजयंतीमाला भी ‘संगम’ में इसे अंजाम दे चुकी हैं। विदेश में बिकनी कभी मुद्दा नहीं रही। यह आश्चर्य और गहरे दु:ख की बात है कि दूसरे विश्वयुद्ध के अंतिम चरण में अमेरिका ने जिन जापानी द्वीपों पर आणविक बम गिराए थे उनमें से एक द्वीप का नाम बिकनी था और शायद उसके अत्यंत लघु होने के कारण इस वस्त्र को बिकनी कहा जाने लगा। पराजय की कीमत कई तरह से अदा करना पड़ती है।





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