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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. बड़ी वारदात की साजिश फूटने से बेचैन पुलिस ने बुधवार को शाम 4 बजे सेंट्रल जेल में छापा मारा। जेल के भीतर देवेंद्रनगर के युवक आसिफ और उसके साथी इरफान उर्फ बबलू तथा एक अन्य को गिरफ्तार कर लिया। इनके खिलाफ पूर्व में कई मामले दर्ज हैं। यह गिरफ्तारी जेल के मुलाकाती कक्ष में मारपीट के मामले में की गई।
एसपी अमित कुमार ने बताया कि सोमवार को आसिफ और बबलू ने अपने साथियों के साथ मिलकर मुलाकाती कक्ष में हत्या के सजायाफ्ता वकील कुरैशी की पिटाई की थी। उसी रोज शाम 5 बजे न्यायालय परिसर में हत्या के विचाराधीन बंदी कादर पर जानलेवा हमला हुआ था। कादर केस के सिलसिले में पेशी में गया था। पुलिस को सबूत मिल गए हैं कि कचहरी में कादर पर हमला आसिफ और बबलू के इशारे पर हुआ। एसपी का कहना है कि न्यायालय की वारदात का बारीकी से परीक्षण किया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक ने दोनों केस की तहकीकात क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। आसिफ और बबलू को क्राइम ब्रांच ने ही जेल में घुसकर पकड़ा।
कुछ पुलिस अफसरों ने नाम नहीं छापे जाने की शर्त पर बताया कि आसिफ के गैंग ने जेल में कादर पर जानलेवा हमले की साजिश रची थी। जेल में कादर का काम तमाम करने के लिए आसिफ ने अपने गुर्र्गो को बुलवाया था। योजनाबद्घ तरीके से उसके गुर्र्गो ने शनिवार की रात एक आटो वाले को पीटा। आटोवाले ने केस रजिस्टर कराया। आरोपियों ने रविवार को थाने में सरेंडर किया। सभी को उसी दिन जेल भेज दिया गया। लेकिन जेल जाते ही कुछ ऐसी बातों का खुलासा हुआ कि पूरी गैंग को उसी रात रिहा किया गया।
कोर्ट में इसलिए हमला
गिरोहबाजों की रातोंरात रिहाई की वजह से जेल में वारदात का प्लान विफल हो गया। इस वजह से कादर पर अदालत परिसर में हमला किया गया। क्राइम ब्रांच सारी घटनाओं का सिलसिलेवार तरीके से परीक्षण कर रही है। कल रात ही कादर के संजयनगर स्थित मकान पर भी आग लगाई गई थी। उस घटना का परीक्षण भी किया जा रहा है। गौरतलब है कि कादर पर डेढ़ साल पहले एक हत्या की साजिश रचने का आरोप है। ऐसा आरोप है कि उसने अपने बेटों और उसके दोस्तों के जरिये अपने ही मोहल्ले के एक युवक का कत्ल करवाया था। उसी केस की सुनवाई चल रही है।
जेल में घुसी फोर्स
आसिफ और उसके साथियों को दबोचने के लिए 200 से ज्यादा जवान कैदखाने में घुस गए थे। आला अफसरों के नेतृत्व में जवान आधा दर्जन गाड़ियों में पहुंचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हथियारबंद जवानों को जेल गेट पर ही रोक दिया गया था। डंडाधारी जवान अफसरों के साथ अंदर दाखिल हो गए। आसिफ और उसके साथी बड़े चक्कर की 11 नंबर बैरक में थे। अफसरों ने आसिफ और बबलू को बाहर बुलवाया और जवानों ने उन्हें दबोच लिया। उसके बाद तीसरे साथी को काबू में किया गया। फोर्स के भीतर घुसने से जेल के प्रहरियों और बंदियों को भी सांप सूंघ गया था।
..जेल अफसरों को धमकी?
सोमवार को वारदात के बाद जेल अफसरों ने आसिफ और उसके साथियों को सेल में डालने की कोशिश की लेकिन उन्होंने जेल अफसरों को ही धमका दिया। कुछ अफसरों को देख लेने की धमकी दी गई। आरोपियों के तेवर देखकर जेल के चक्कर अफसर भी जबरदस्ती करने की हिम्मत नहीं जुटा सके। जेल अधीक्षक और जेलर से शिकायत का भी नतीजा नहीं निकला। जेल अमले पर बदमाशों की धमकी का असर इतना ज्यादा था कि बदमाशों को सेल में शिफ्ट करना तो दूर, अलग-अलग करने की गरज से उनकी बैरकें तक नहीं बदली गईं। पुलिस ने बुधवार को उन्हें एक ही बैरक से दबोचा।
कलेक्टर का हस्तक्षेप
पुलिस की ताजा जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। तहकीकात में पता चला है कि कैदखाने में बड़ी वारदात की साजिश जिला प्रशासन के अफसरों के हस्तक्षेप से फेल हुई। दरअसल रविवार को आसिफ के 16 गुर्गे दोपहर 3 बजे जेल में दाखिल हो गए। जेल में घुसते ही सभी मरने-मारने की बात करने लगे। उनकी बात सुनकर अफसर बेचैन हो गए। आरोपियों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई थी, इसलिए जेल अधीक्षक एसएस तिग्गा ने प्रशासन के आला अफसरों से संपर्क किया और कहा कि इतने सारे बदमाशों पर रातभर काबू नहीं रखा जा सकता और बड़ी वारदात हो सकती है। बताते हैं कि तब कलेक्टर विकासशील ने डिप्टी कलेक्टर को निर्देश दिए कि सबको जमानत दी जाए। इस तरह उन्हें रातोंरात जेल से बाहर निकाला गया। जेल के इतिहास में इस तरह की पहली घटना है।
जेल महकमा भी घेरे में
जेल के मुलाकाती कक्ष में मारपीट का केस भी जेल अफसरों के लिए गले की हड्डी बन गया है। सूत्रों ने बताया कि सोमवार को आसिफ से मुलाकात के लिए कोई नहीं पहुंचा था। इसके बावजूद उसे मुलाकाती कक्ष तक पहुंचाया गया। जेल का नियम है कि कोई भी बंदी या कैदी अपनी बैरक से तब तक बाहर नहीं निकल सकता, जब तक कि उससे कोई मुलाकात करने नहीं आए। बताते हैं कि इस मामले में जांच में फंसने के अंदेशे से ही जेल अफसरों ने पुलिस में भेजी गई शिकायत में आसिफ के नाम का जिक्र नहीं किया था। देवेंद्रनगर थाने में मारपीट की जो शिकायत भेजी गई थी, उसमें केवल बबलू का नाम था। उसके साथ अन्य जरुर जोड़ा गया था। अब पूरा मामला उजागर होने के बाद जेल के अधिकारी लीपापोती भी नहीं कर पा रहे हैं।