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छत्तीसगढ़ः चावल की खुशबू उड़ी

रायपुर. सहकारी सोसाइटियों और मंडी में इस बार खुशबूदार चावल (धान) की आवक नहीं है। सामान्य किस्म का धान ही पहुंच रहा है। इस वजह से इस बार खुशबूदार चावल के निर्यात पर असर पड़ सकता है यानी छग के चावल की खुशबू दूर तक नहीं फैलेगी।

छत्तीसगढ़ का चावल महाराष्ट्र, गुजरात और मध्यप्रदेश के साथ बांग्लादेश भी भेजा जाता है। निर्यात होने वाले चावल में बादशाह भोग और दुबराज प्रमुख हैं। सहकारी सोसाइटियों और मंडियों में इस बार सामान्य किस्म के धान की आवक ही सामान्य है। अच्छे किस्म का धान बहुत कम आ रहा है। आमतौर पर हर साल करीब 10 लाख टन चावल का निर्यात होता है। इसमें 20 से 25 फीसदी खुशबूदार चावल भेजा जाता है।

मानसून में देरी के कारण इस बार राज्य के किसानों ने अच्छी क्वालिटी का धान कम लगाया। छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश अग्रवाल ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि मिलिंग की प्रक्रिया में अब तक अच्छी किस्म के धान की आवक शुरू नहीं हुई है। इससे साफ संकेत मिलता है कि इस बार अच्छा चावल कम बन पाएगा। निर्यात नहीं हो पाएगा।

राज्य में कमी नहीं : अच्छे चावल का सार्वजनिक वितरण प्रणाली से कोई सीधा लेना-देना नहीं है और सामान्य किस्म के चावल की यहां कमी नहीं होगी। खाद्य सचिव बीएस अनंत ने बताया कि राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली, मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना, मध्यान्ह भोजन आदि के लिए सालभर में करीब 16 लाख टन चावल की आवश्यकता है।

यानी करीब 24 लाख टन धान से राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली का काम हो जाएगा। औसतन धान का उत्पादन 61 लाख टन के आसपास है। श्री अनंत के अनुसार धान का उत्पादन कम हो या अधिक, चूंकि राज्य की जरूरत पहले पूरी की जाती है इसलिए यहां चावल की कमी नहीं होगी, यह तय है। राज्य शासन विभिन्न सहकारी सोसाइटियों के माध्यम से करीब 35 लाख टन धान की खरीदी करता है। इसमें करीब 24 लाख टन धान रखकर शेष एफसीआई को दे दिया जाएगा। इसके अलावा व्यापारी मंडियों में धान की खरीदी करते हैं। व्यापारी जितने धान की खरीदी करते हैं उसका आधा कस्टम मिलिंग में दे देते हैं शेष चावल का स्थानीय और बाहर के बाजार में व्यवसाय होता है।

धान का रकबा बढ़ा
पिछले साल की तुलना में इस साल छत्तीसगढ़ में धान का रकबा थोड़ा बढ़ा है। कृषि विभाग के अपर संचालक एमएस केरकेट्टा ने बताया कि राज्य में इस साल 47 लाख 81 हजार हेक्टेयर में धान की खेती हुई है। जबकि पिछले साल 47 लाख 69 हजार हेक्टेयर में खेती हुई थी। रकबा बढ़ने के बाद इस बार अच्छे धान की आवक कम है। रकबा बढ़ने के बावजूद इस बार पैदावार भी बहुत अधिक नहीं बढ़ेगी। अनुमान है कि पिछले साल के समान ही राज्य में धान की पैदावार होगी।





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