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मुंबई. मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख का बुधवार की रात 9.45 बजे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा इस्तीफा मंजूर होते ही महाराष्ट्र की सियासी सरगर्मी एकाएक तेज हो गई। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल नेताओं ने रात भर अपने पक्ष में ज्यादा से ज्यादा विधायकों को करने के लिए लॉबिंग की।
फिर अनलक्की साबित हुए रितेश : विलासराव देशमुख के इस्तीफे की असली वजह चाहे जो रही है, परंतु बेटा रितेश देशमुख एक बार फिर उनके लिए अनलक्की साबित हुआ है! इसके पहले वे अक्टूबर 1999 से जनवरी 2003 तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थी। उस वक्त बेटे रितेश देशमुख की पहली फिल्म तुझे मेरी कसम को प्रमोट करने को लेकर वे विवादों में फंस गए थे। यह विवाद इतना भारी पड़ा कि ऐन मकर-संक्रांति त्यौहार के दिन उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।
देशमुख से क्या हुई गलती : 26 नवंबर को मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले के बाद देशमुख जिस प्रकार से बेफिक्र नजर आये, वह उनके लिए बहुत ही घातक साबित हुआ। जनता में भारी असंतोष होने के बावजूद जब वे फिल्म निर्माता रामगोपाल वर्मा और अभिनेता बेटे रितेश देशमुख के साथ होटल ताज और ओबेरॉय का दौरा करना भी उनके लिए आत्मघाती साबित हुआ है। इन दो बड़ी वजहों के अलावा केंद्रीय कृषि मंत्री एवं राकांपा सुप्रिमो शरद पवार से अनबन ने भी विलासराव देशमुख को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने को मजबूर किया। आतंकवादी हमले की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकारते हुए राकांपा ने अपने कोटे के गृह मंत्री आर.आर. पाटिल का इस्तीफा ले लिया था। इसके बाद देशमुख की पूरी कोशिश रही कि उनकी कुर्सी बच जाये, परंतु पवार की ओर से कांग्रेस को साफ-साफ शब्दो में कह दिया गया कि चूंकि उन्होंने पाटिल को हटा दिया है, लिहाजा जनआक्रोश से बचने के लिए वह भी देशमुख को हटाये।
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कौन है शामिल : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने वालों की फेहरिस्त काफी लंबी है। इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे, राजस्व मंत्री नारायण राणो, उद्योग मंत्री अशोक चव्हाण और वरिष्ठ सांसद बालासाहेब विखे पाटिल शामिल हैं। चूंकि मराठा क्षत्रप एवं राकांपा सुप्रिमो को टक्कर देने वाले नेता की तलाश कांग्रेस हाईकमान को है, लिहाजा यह तलाश राजस्व मंत्री नारायण राणो पर खत्म होती है। अक्टूबर 2004 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 69 और राकांपा के 71 विधायक चुने गए थे। राणो के कांग्रेस में आने के बाद कांग्रेस महाराष्ट्र में नंबर वन पार्टी बनी। उन्होंने शिवसेना के अपने कई विधायकों का इस्तीफा दिलाकर चुनाव जीताया और इस वक्त रा%य में राणो के कारण कांग्रेस के 75 विधायक हैं।
सोनिया को सौंपा जा सकता है फैसला : महाराष्ट्र का अगला मुख्यमंत्री कौन हो। इसके लिए विधायकों की राय जानने के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं का एक शिष्टमंडल गुरूवार को मुंबई आ रहा है। यह शिष्टमंडल कांग्रेस विधायकों की बैठक लेकर उनकी राय लेगा। माना जा रहा है कि जिस तरह से राकांपा ने उप मुख्यमंत्री किसे बनाया जाये। इसका फैसला लेने का सर्वाधिकार पार्टी अध्यक्ष शरद पवार को दे दिया है, ठिक उसी तरह गुरुवार को कांग्रेस नेताओं की मैराथन बैठक होगी और अंत में किसे मुख्यमंत्री बनाया जाये इसका अधिकार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंपने का फैसला लिया जा सकता है।
राहुल और प्रियंका की नाराजगी पड़ी भारी : विलासराव देशमुख ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए दिल्ली में जबरदस्त लॉबिंग की थी।यह उनकी लॉबिंग का ही नतीजा था कि शनिवार को कांग्रेस वर्किग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में इस्तीफा देने की पेशकश करने के बावजूद बुधवार की रात तक वे मुख्यमंत्री बने रहे। बुधवार को मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले को सात दिन पूरे हो गए। इस दौरान पूरे देश में खास कर मुंबई में जिस तरह से लोगों ने राजनीतिक लोगों के खिलाफ अपने गुस्से का इजहार किया, उसे देख कर कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी-बढ़ेरा मुख्यमंत्री पद से देशमुख को हटाने की बात पर एक हो गए। राहुल और प्रियंका की राय के आगे देशमुख के लिए लॉबिंग करने वाले अहमद पटेल, दिग्विजय सिंह, राजीव शुक्ला जैसे नेताओं के तेवर ठंडे पड़ गए।