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आतंकी हमले: बड़े अस्पताल,आसान निशाने

अहमदाबाद. पहले अहमदाबाद का सिविल अस्पताल और फिर मुंबई के कामा अस्पताल को आतंकियों द्वारा निशाना बनाए जाने से स्पष्ट है कि उनकी नापाक नजर अब शहरों के बड़े अस्पतालों पर हैं। इसके बावजूद आतंकियों के लिए इन आसान निशानों पर सुरक्षा के प्रति भारी लापरवाही देखने मिलती है।

आलम यह है कि ऐसे बड़े अस्पतालों में आज भी मरीजों के संबंधियों से पास लेकर टिफिन में कुछ भी रखकर आसानी से अंदर जाया जा सकता है। कहीं कोई जांच या निगरानी नहीं होने के कारण अस्पतालों की सुरक्षा पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है।

नगर पालिक निगम द्वारा संचालित यहां के वीएस और एलजी अस्पताल में कर्मचारी निर्धारित फीस लेकर किसी को भी मरीज से मिलने की अनुमति दे देते हैं। ऐसे में मरीज का रिश्तेदार बताकर कोई भी व्यक्ति अंदर जा सकता है। इतना ही नहीं शाम को 4 से 6 बजे के बीच कोई भी बिना फीस दिए मरीज से मिलने जा सकता है। कहीं कोई जांच नहीं होती। गौरतलब है कि गत 26 जुलाई को आतंकियों ने शहर के एलजी अस्पताल को निशाना बनाया था।

मुंबई के कामा अस्पताल में हुए आतंकी हमले के मद्देनजर यहां के अस्पतालों में इस तरह की लापरवाही के कारण किसी गंभीर हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

‘लगातार शिकायतें मिलने पर दो दिन पहले ही अस्पताल की पूरी सुरक्षा व्यवस्था को बदला गया है। ये अब पहले से बेहतर है।’
- डा. आरजी सुरेला, अधीक्षक, एलजी अस्पताल





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