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नई दिल्ली. मुंबई हमलों में आईएसआई और आतंकी संगठन लश्करे तैयबा का हाथ होने के बारे में भारत ने पाकिस्तान को पक्के सबूत सौंप दिए हैं। सूत्रों ने वीरवार को बताया कि भारत ने आतंकियों को ट्रेनिंग देने वालों के नाम, ट्रेनिंग की जगह और उन नाम-पतों की जानकारी दी है, जिनका कुछ समय पहले तक आईएसआई से जुड़ाव रहा है।
उधर एजेंसी के अनुसार, अमेरिका ने भी मुंबई हमलों में आईएसआई और पाकिस्तानी सेना का हाथ होने के पुख्ता सबूत गिलानी सरकार को सौंपे हैं।
अमेरिका के ज्वॉइंट चीफ्स और स्टाफ के प्रमुख एडमिरल माइक मुलेन ने अपनी यात्रा के दौरान पाक नेताओं को स्पष्ट कर दिया है कि पाक सेना एक बार फिर सत्ता पर कब्जा जमाने की फिराक में है। अपने इसी मकसद को पूरा करने के लिए वह आतंकवाद को बढ़ावा देकर भारत-पाक के बीच तनाव को बरकरार रखना चाहता है।
सूत्रों का कहना है कि लश्कर पर पाकिस्तान ने भले ही अपने देश में पाबंदी लगा रखी हो, लेकिन इसका सरगना हाफिज सईद अभी भी आजाद घूम रहा है। लश्कर अब ‘जमात-उद-दावा’ के नए नाम से सक्रिय है, ताकि उसकी गतिविधियों पर कोई वैधानिक अड़चन न आए।
सूत्रों ने बताया कि अमेरिका को भी सईद और आईएसआई के बीच घनिष्ठ संबंधों की जानकारी है। अमेरिका के ज्वॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के प्रमुख एडमिरल माइक मुलेन ने भी अपनी यात्रा के दौरान पाकिस्तानी नेताओं को स्पष्ट कर दिया है कि बुश सरकार के पास पाक का हाथ होने के पक्के सबूत मौजूद हैं।
उधर, एक पत्रिका को दिए इंटरव्यू में सईद ने कहा है कि लश्कर कभी भी निर्दोष नागरिकों की हत्या करने का काम नहीं करता। सईद ने इन आरोपों से इनकार किया है कि मुंबई हमलों में लश्कर का हाथ है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि सईद ने यह बयान आईएसआई के इशारे पर दिया है।
सेना को भी थी जानकारी : अमेरिकी राजनयिक यह मानने को तैयार नहीं हैं कि मुंबई में आतंकी हमले के आईएसआई के षड्यंत्र की जानकारी पाकिस्तानी सेना को नहीं थी। हालांकि उनका यह मानना है कि पाक सरकार इन हमलों में शरीक नहीं थी, क्योंकि वह खुद देश में सक्रिय आतंकियों के निशाने पर है।
सूत्रों के अनुसार, मुंबई हमलों की साजिश के बारे में अमेरिका के पास भारत से कहीं ज्यादा सबूत हैं। अमेरिका ने पाकिस्तान को दो-टूक शब्दों में कहा है कि वह लश्करे तैयबा के खिलाफ कार्रवाई सूत्रों का कहना है कि भारत पर आतंकी हमले करवाकर पाकिस्तान की सेना अफगानिस्तान में पेश आ रहीं मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकलना चाहती है।
पाक-अफगान सीमा पर तालिबान के खिलाफ संघर्षरत पाकिस्तानी सेना के 900 जवान व अफसर नौकरी छोड़ चुके हैं। ऐसे में यदि भारत-पाक के बीच तनाव बढ़ता है तो सेना को पूर्वी सीमा पर तैनात किया जा सकता है। लेकिन अमेरिका ने पाक सेना की इस रणनीति को ताड़कर उस पर ऐसा कोई कदम न उठाने का दबाव बनाया है।