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इस्लामाबाद. लश्कर के संस्थापक हाफीज मोहम्मद सईद के मुरीदके स्थित मुख्यालय पर भारत की ओर से हवाई हमले की आशंका जताते हुए गुट ने वीरवार को इसके दरवाजे विदेशी मीडिया के लिए खोल दिए। लश्कर ने यह बताने की कोशिश की कि वह सिर्फ शैक्षिक संस्थान है, आतंकियों के प्रशिक्षण की वहां कोई व्यवस्था नहीं है।
सईद के निकट सहयोगी व प्रतिबंध के बाद लश्कर के बदले रूप जमात-उद-दावा के प्रवक्ता याह्या मुजाहिद ने भारत के इस दावे का खंडन किया कि मुंबई हमले में पकड़े गए आतंकी को मुरीदके स्थित मरकज-ए-तैयबा में ट्रेनिंग दी गई थी।
दो सौ एकड़ का परिसर :
विदेशी पत्रकारों को 200 एकड़ में फैले परिसर के विभिन्न हिस्सों में जाने की अनुमति दी गई। उन्हें वहां चलाए जा रहे स्कूल व कॉलेज की गतिविधियां दिखाई गई। मरकज-ए-तैयबा परिसर में खेत, मस्जिदें, मस्त्य पालन केंद्र और अस्तबल भी हैं। केंद्र के मुख्य प्रवेश द्वार पर भारी हथियारों से लैस गार्ड तैनात हैं और परिसर के चारो ओर कटिली बाड़ लगी है। ऊंचे वृक्षों से घिरा होने के कारण बाहर से अंदर की गतिविधियां नजर नहीं आती।
लश्कर से संबंध नहीं :
विदेशी मीडिया को बताया गया कि वहां पांच हजार छात्र नामांकित हैं, जिन्हें प्राथमिक से लेकर यूनिवर्सिटी तक की इस्लामी शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा भी दी जाती है। मुजाहिद ने दावा किया कि परिसर में जमात-उद-दावा का मुख्यालय है, जो पूरी तरह से इस्लामी चैरिटी संस्था है और इसका लश्कर-ए-तैयबा से कोई संबंध नहीं है।
बहुत गहरी जड़ें हैं लश्कर की
भारत में कई आतंकी हमलों के लिए कुख्यात लश्कर-ए-तैयबा (पवित्र लोगों की सेना) मुंबई हमले के बाद एक बार फिर फोकस में आ गया है। लश्कर, अहले हदीथ (वहाबी) जेहादी गुट है। इसका जन्म मरकज दावातुल इरशाद (धर्मातरण व उपदेश केंद्र) की सैन्य शाखा के रूप में हुआ था। मरकज दावातुल इरशाद की स्थापना 1988 में तीन इस्लामी विद्वानों हाफीज मोहम्मद सईद, जफर इकबाल और डॉ. अब्दुल्ला आजम ने की थी।
सईद व इकबाल लाहौर की इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी के इस्लामी अध्ययन केंद्र के शिक्षक थे। आजम इस्लामाबाद स्थित अंतरराष्ट्रीय इस्लामी यूनिवर्सिटी के शिक्षक था। आजम को फलस्तीनी आतंकी गुट हमास का विचारक और अल-कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन का धार्मिक व राजनीतिक संरक्षक भी बताया जाता है। मरकज दावातुल इरशाद की स्थापना का उद्देश्य कुरान व सुन्नत आधारित समाज का निर्माण करना था।