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तो सेना के हवाले कर दें देश

चंडीगढ़...मैं मोमबत्ती जलाकर उन लोगों की यादों को दफन नहीं करना चाहता जो मारे गए। मेरे मन में गुस्सा है, तकलीफ है और बदला लेने का जज्बा है। मुझे नहीं लगता हम जी रहे हैं। मुझे इसमें कोई विजय नजर नहीं आ रही और न ही जश्न मनाने का कोई कारण। ताज होटल के बाहर तिरंगा फहराने का भी कोई मतलब नहीं।

दस आंतकवादियों ने पूरे देश को 60 घंटों तक बदहवास करके रखा। हमें मुंहतोड़ जवाब देना है। अगर सरकार हमारी हिफाजत नहीं कर सकती तो इस देश को फौज के हवाले कर दें। मुंबई हमले के एक हफ्ते बाद भी यह ंिचंता उभरकर सामने आ रही है एक हिंदुस्तानी की। ..भले ही यह मोबाइल पर दिया जा रहा है एक संदेश हो लेकिन इस संदेश को बनाने वाले की भावना आम हिंदुस्तानी के आक्रोश, और चिंता को अभिव्यक्त कर रही है।

इस संदेश का मजमून इस घटना के बाद देश के नीति निर्धारकों को भी कोस रहा है। ..प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और दूसरे नेताओं के भाषण मेरे आक्रोश को कम नहीं कर पा रहे..मैं जिंदगी में पहली बार हिंदुस्तानी होने पर फ़क्र महसूस नहीं कर रहा क्योंकि यह देश सुरक्षित नहीं है और भ्रष्टाचार बढ़ रहा है.. हम प्रतिक्रिया चाहते हैं.. इस देश को लीडर चाहिए..यह वक्त जागने का है..।

जी हां, मुंबई हमले के बाद रोजाना सैकड़ों संदेश मोबाइल या ई-मेल के जरिए राष्ट्रीयता की भावना का संचार कर रहे हैं। इन संदेशों में छिपा है आम हिंदुस्तानी का इस राष्ट्र के भविष्य के लिए सरोकार। बस जरूरत है इस चिंता को बरकरार रखने की ताकि फिर कहीं हमारी व्यवस्था सो न जाए और फिर कहीं मुंबई जैसी वारदात हिंदुस्तान के माथे पर कलंक न लगा जाए।





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