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भोपाल. भोपाल की लाइफलाइन बड़े तालाब को बचाने जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कॉपरेरेशन द्वारा 221 करोड़ रुपए से किए गए कार्यो को बर्बाद करने में नौकरशाहों ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। इसका प्रमाण यह है कि बैंक तथा पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) को बड़े तालाब के बारे में झील संरक्षण प्राधिकरण (एलसीए) द्वारा जो जानकारी भेजी गई है या उनके जो पत्र आए हैं, उसका रिकार्ड एलसीए के पास नहीं है। फाइलें गायब होने से उन मुद्दों पर पर्दा पड़ गया है, जिससे यह पता चलता कि बड़े तालाब के संरक्षण के लिए एलसीए ने जो राशि खर्च की है वह वास्तव में किस कार्य पर खर्च की गई। उसकी उपयोगिता थी भी या नहीं।
भोज वेटलैंड योजना के वर्ष 2004 में समाप्त होने के बाद योजना से बचे 24 करोड़ रु. के ब्याज से एलसीए का गठन किया गया। गठन के साथ ही बैंक, एप्को, एलसीए और शासन के बीच एक समझौता हुआ। इसमें निश्चित किया गया कि एलसीए बड़े तालाब को प्रदूषण से मुक्त रखने जनजागरूकता पैदा करेगा। साथ ही तालाब के जलग्रहण क्षेत्र में होने वाले अतिक्रमण को रोकेगा। इन कार्यो की मॉनिटरिंग एप्को करेगा। समझौते के अनुसार, एलसीए को झील के संरक्षण के लिए किए गए कार्यो की रिपोर्ट बैंक, एप्को और शासन को दी जानी थी। एलसीए ने बड़े तालाब के संरक्षण के लिए समझौते अनुसार कार्रवाई ही नहीं की।
समय-समय पर बैंक, एप्को और शासन ने जो आपत्तियां उठाईं, उसकी फाइल एलसीए के पास मौजूद नहीं है। एलसीए ने यह बात एक स्वयंसेवी संस्था द्वारा सूचना का अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के उत्तर में दी है। एलसीए की उदासीनता का नतीजा यह निकला कि भोज वेटलैंड योजना के तहत किए गए करोड़ों के कार्य भी बड़े तालाब को संरक्षित नहीं कर पाए।
एलसीए के उद्देश्य अधूरे
>> बड़े तालाब के जलग्रहण क्षेत्र में अतिक्रमण को रोकना।
>> तालाब को स्वच्छ बनाए रखने लोगों को जागरूक बनाना।
>> तालाब में मछली पालन को बढ़ावा देना, जिससे ज्यादा से ज्यादा मछुआरे लाभान्वित हों।
>> तालाब के पानी और मिट्टी की गुणवत्ता की जांच करना।
>> आसपास के क्षेत्र में गैर रासायनिक खेती को बढ़ावा देना।
भोज वेटलैंड योजना की स्थिति
भोज वेटलैंड योजना के तहत 55 करोड़ रु. केवल इसलिए खर्च किए गए थे कि शहर का सीवर बड़े तालाब में न मिले। इसके लिए 61.783 किलोमीटर ट्रंक लाइन बिछाई गई। सीवर का पानी साफ करने के बाद किसानों को मिले, इसके लिए चार ट्रीटमेंट प्लांट बनाए गए। यह वर्तमान में अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहे हैं। साथ ही नालों का पानी अब भी बड़े तालाब में गिर रहा है।
ट्रीटमेंट प्लांट की स्थिति
पीएचई के अनुसार फिलहाल प्लांट 40 प्रतिशत क्षमता पर काम कर पा रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि शहर में मौजूद घरों की सीवर लाइनें ट्रंक लाइन से नहीं जुड़ी हैं। जब यह जुड़ जाएंगी और प्लांट पूरी क्षमता से काम करने लगेंगे, तब प्लांट से 56 एमएलडी पानी शुद्ध किया जा सकेगा। वर्तमान में इन प्लांटों पर 26 एमएलडी पानी ही शुद्ध हो पा रहा है।
शासन, एप्को, जेबीआईसी और एलसीए के बीच हुए पत्राचार का रिकार्ड उपलब्ध नहीं होने के बारे में मुझे जानकारी नहीं है, मैं पता लगाने का प्रयास करूंगी।
- दीप्ति गौड़ मुखर्जी, सीईओ, एलसीए व एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर, एप्को