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‘भगोड़ा नहीं हो सकता मेरा पति’

रेवाड़ी पति के हिस्से में वीरता के सात मेडल और पत्नी के हिस्से में पति के भगोड़ा होने का कलंक। अपने सैनिक को कभी वीरता के मेडल देने वाली सेना ही उसे भगोड़ा घोषित कर चुकी है, लेकिन अपने पति के मेडलों को दिखाते हुए उसकी पत्नी यह मानने को तैयार नहीं कि उसका पति भगोड़ा है। वर्षो के इंतजार और संघर्ष के बाद अब लाली पूरी तरह से टूट चुकी है और वीर पति के मेडल राष्ट्रपति को लौटने जा रही है।

बूढ़ी हुई पति के इंतजार में : पिछले 24 साल से 55 वर्षीय लाली देवी अपने बहादुर सैनिक पति के आने का इंतजार कर रही है। सेना अपने इस जवान को भगोड़ा घोषित कर चुकी है तो समाज के लोग व रिश्तेदार उसे मृतक मानकर भूल चुके हैं, लेकिन लाली ने हिम्मत नहीं हारी है। लाली का कहना है कि अगर उसका पति भगोड़ा होता तो उसे वीरता व बहादुरी के सात मेडल नहीं मिलते। केंद्र, राज्य सरकार व जिला प्रशासन से उसकी उम्मीदें खत्म हो चुकी हैं, इसलिए उसने अब पति को मिले मेडल राष्ट्रपति के वापस करने का निर्णय लिया है।

हत्या की आशंका जताई थी : रोशनलाल की पत्नी लाली देवी का दावा है कि उसके पति की साजिश के तहत हत्या कर दी गई है, जिसका आभास उसके पति ने 15 मई 1982 को भेजे पत्र में कर दिया था। लाली ने बताया कि जब-जब उसकी अपने पति से बात हुई उसने एक अधिकारी से अपने को खतरे के बारे में जरूर बताया था। उसका कहना था कि इस अधिकारी ने जवानों के नाम पर आने वाली खाद्य सामग्री में लाखों रुपए का गबन किया हुआ था। सामग्री सप्लायर होने के नाते इसकी जानकारी उसके पति को लग गई थी। पहले अधिकारी ने मुंह बंद रखने को कहा बाद में नहीं मानने पर जान से हाथ धोने की धमकी दी थी।

आर्मी ने तीन बार लापता दिखाया : रोशन लाल आर्मी में 24 घंटे के दौरान एक बार नहीं तीन बार अलग-अलग समय में गायब हुआ है। कुमाऊ बटालियन से उसके परिजनों को भेजे पत्र में रोशनलाल को 21 मई 1984 को रात 9 बजे से लापता होना बताया है। पत्र में कहा गया है कि रोशनलाल 22 मई 1984 को रात ढाई बजे गायब होगया, आर्मी हेडक्वार्टर के पत्र में 21 मई 1984 को रात साढ़े 10 बजे लापता बताया गया है।

पंचायत उठाएगी आवाज: माजरा गांव के सरपंच महादेव का कहना है कि इस सैनिक के साथ बहुत ज्यादती हुई है। पंचायत ने तय किया है कि वह स्थानीय नेताओं व प्रशासनिक अधिकारियों से मिलेगी। कोई कार्रवाई नहीं होती है तो पंचायत को मजबूरन कठोर कदम उठाने पड़ सकते हंै।

यह है मामला

माजरा गांव निवासी लाली देवी रोशनलाल यादव पुत्र भगवान सिंह की पत्नी है। रोशनलाल 19 जुलाई 1963 को कुमाऊ रेजीमेंट (नंबर 415446) में भर्ती हुआ था और 1980 तक उन्होंने अपनी बहादुरी व साहस का ऐसा परिचय दिया कि रक्षा मंत्रालय ने उसे सिपाही से हवलदार बना दिया। 15 मई 1982 को इस फौजी का पत्र आया कि फौज में उसकी जान को खतरा है और 19 मई 1984 को अचानक आर्मी से पत्र आया है कि यह फौजी गायब है और उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया है। इसके बाद लालीदेवी को उसके पति की दी जाने वाली सभी सुविधाओं को बंद कर दिया गया। हैरान परिजन आज भी रोशनलाल की तलाश कर रहे हैं।





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