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'गोली खाकर भी बचाने में जुटे रहे'

मुंबई. आतंकी हमलों से लोगों की जान बचाने की मुहिम में होटल ओबेराय के 22 साल के अप्रैंटिस जोसेफ जॉय पुलितहर भी जी-जान से जुटे रहे। जोसेफ बताते हैं कि हमले के वक्त वे ओबेराय होटल की निचली लॉबी के रेस्टोरेंट में अपने एक साथी कर्मचारी के साथ थे।

तभी शीशों के चटकने की जोरदार आवाजें आईं। पहले हमने सोचा कि आग लगी है, बाद में समझ में आया कि आतंकी हमला है। जोसेफ ने बताया कि तभी एक बुजुर्ग विदेशी महिला लॉबी की तरफ आती दिखी, हमने जोर से आवाज देकर उसे छुपने को कहा। आतंकियों को उसकी आवाज सुनाई दे गई और उन्होंने अपनी बंदूकों का रुख उनकी तरफ कर दिया। मैंने गोलियों की परवाह न करते हुए उस महिला को खींचकर अंदर किया और सीढ़ियों के रास्ते नीचे चले जाने को कहा। अस्पताल में भर्ती जोसेफ के पैर में गोली लगी है। उसका साथी भी घायल है।

गोली लगने के बावजूद दोनों वापस रेस्टोरेंट लौटे और वहां मौजूद करीब 30 लोगों से पिछले दरवाजे से निकल जाने को कहा। जोसेफ बताते हैं कि रेस्टोरेंट वाले फ्लोर पर हमने अपने साथ काम करने वाली एक लड़की की लाश पड़ी देखी। कंधार रेस्टोरेंट में हुई गोलीबारी में भी उनका एक दोस्त मारा गया। जोसेफ बताते हैं कि उस वक्त मैंने सिर्फ मदद की सोची..अपनी जान की परवाह नहीं की।

यात्री कृपया पिछले दरवाजे से निकल जाएं
मुंबई. छत्रपति शिवाजी टर्मिनस रेलवे स्टेशन के सैकड़ों लोग वहां के एनाउंसर 37 साल के विष्णु झेंडे की तारीफ करते नहीं थकते जिनकी होशियारी ने उनकी जान बचा ली। जब आतंकियों ने प्लेटफार्म पर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू की तो गाड़ियों की आवा-जाही बता रहे झिंडे ने फौरन यह उद्घोषणा शुरू कर दी कि आतंकियों ने हमला बोल दिया है और यात्री प्लेटफार्म नंबर एक के पिछले दरवाजे से बाहर निकल जाएं।

वे सीएसटी के मुख्य द्वार और लॉबी में कतई न आएं क्योंकि आतंकी यहीं फायरिंग कर रहे हैं। झेंडे ने पुलिस फोर्स को भी अलर्ट किया। तब बौखलाए आतंकियों ने झेंडे के केबिन की ओर रुख कर गोलियां बरसाईं लेकिन वे बाल-बाल बच गए। रेल मंत्रालय ने समझ-बूझ दिखाने के लिए उन्हें 10 लाख रुपए का इनाम दिया है।

साथी से रायफल छीनकर चलाई गोलियां
मुंबई. आरपीएफ के कांस्टेबिल जिल्लू यादव ने अपने तीन दशक की नौकरी में पहली बार गोलियां चलाईं। जिल्लू उस दिन सीएसटी स्टेशन पर महज एक लाठी के साथ तैनात थे। उन्होंने देखा कि महाप्रबंधक के कक्ष को जाने वाले रास्ते पर एक आतंकी अंधाधुंध गोलियां बरसा रहा था। उन्होंने वहां खड़े जीआरपी के सिपाही से आतंकी को निशाना बनाने को कहा लेकिन वह इतना डरा हुआ था कि उसके हाथ-पांव कांप रहे थे। उसने अपनी रायफल देने से भी इनकार कर दिया, तब जिल्लू ने उससे रायफल छीनकर आतंकी को निशाना बनाकर फायरिंग की। जिल्लू की इस बहादुरी की रेलमंत्री ने भी तारीफ की और साथ ही 10 लाख का इनाम भी दिया।





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