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जल्दबाजी में किसी नतीजे पर पहुंचना ठीक नहीं

लीडरशिप मंत्र. पिछले हफ्ते मेरी एक चचेरी बहन को कम्प्यूटर साइंस कॉपरेरेशन (जो दुनिया में आठवीं सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी है) से साक्षात्कार के लिए बुलावा आया, जिसमें उससे पहले अपना बायो-डाटा भेजने के लिए कहा गया था। उसने अपने बायो-डाटा की शुरुआत यहां से की कि उसे सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में सी, सी++ इत्यादि की जानकारी है। अब चूंकि वह आईएसओ सर्टिफिकेशन और इंश्योरेंस सेक्टर में काफी समय से काम कर रही है, इस वजह से उसका इन चीजों से ज्यादा वास्ता नहीं रहा।

वह साक्षात्कार के लिए पहुंची। जब उससे वहां सी, सी++ के बारे में कुछ पूछा गया, तो वह सकपका गई। उसने बिना यह सोचे कि यह पूछने के पीछे साक्षात्कारकर्ता का मंतव्य क्या है, वह बचाव की मुद्रा में आ गई। उससे कुछ आगे कहते न बना और वह सीधे नौकरी को ठुकराकर वापस चली आई। बाद में उसे महसूस हुआ कि उसने बहुत बड़ी गलती कर दी है।

जब भी कोई हमसे ऐसे किसी विषय के बारे में बात करना चाहता है जिसके बारे में या तो हम नहीं जानते अथवा वह विषय हमें नापसंद है, तो हम तुरंत उस विषय पर पूर्ण विराम लगाने की कोशिश करते हैं। कभी-कभार हम यह महसूस नहीं कर पाते कि सामने वाला पक्ष हमसे क्या कहने की कोशिश कर रहा है और हम अपनी पूर्व-धारणाओं के चलते पलायनवादी हो जाते हैं।

दरअसल, होता यह है कि हम परिस्थितियों को पूरी तरह जाने बगैर जल्द ही किसी नतीजे पर पहुंच जाते हैं। ऐसा बिलकुल नहीं होना चाहिए। बेहतर यही है कि पहले बातों अथवा तथ्यों के बारे में अच्छी तरह जान लें, इसके बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचें।
-लेखक नेतृत्व प्रशिक्षण संस्था ‘लीडकैप’ के संस्थापक हैं।





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