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संपादकीय. थाईलैंड में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने बैंकाक के दो हवाई अड्डों की पिछले दो सप्ताह से जारी घेराबंदी को फिलहाल खत्म कर दिया है। पिछले कई सप्ताह से जारी बैंकाक हवाई अड्डे की घेराबंदी के बाद तेजी से बदलते घटनाक्रम में थाईलैंड की संवैधानिक अदालत ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए थाईलैंड के तीन प्रमुख सत्तारूढ़ दलों को गैरकानूनी करार दिया और प्रधानमंत्री सोमचाई वोंगसावत सहित उनकी पार्टी के एक सौ अन्य नेताओं को भी पांच साल के लिए राजनीति करने से प्रतिबंधित कर दिया।
अहम यह है कि वहां जारी गतिरोध में हस्तक्षेप करते हुए अदालत ने अपने फैसले में कहा कि राजनीतिक दलों ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को अनदेखा किया। जिसके बाद प्रधानमंत्री सोमचाई वोंगसावत को इस्तीफा देना पड़ा। उनके हटने के बाद तत्काल कामकाज उप प्रधानमंत्री देख रहे हैं, लेकिन थाईलैंड के आम लोगों के बीच यह सवाल बदस्तूर कायम है कि नया प्रधानमंत्री कौन होगा?
थाईलैंड में उत्पन्न इस राजनीतिक संकट की बड़ी वजह यह है कि टकसिन चिनावाट के प्रधानमंत्री का पद छोड़ने के बाद देश के तीनों प्रमुख दलों ने चुनाव का बहिष्कार किया था। विपक्षी दल थे ही नहीं, सो प्रधानमंत्री को पचास प्रतिशत से अधिक मत मिले। प्रधानमंत्री इसे अपनी जीत बता रहे थे, लेकिन विपक्ष का कहना था कि ये उनकी हार है। अहम बात यह है कि थाईलैंड के राजनीतिक इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि चुनाव में वहां सीटें खाली रह गई हों, क्योंकि कहीं-कहीं सिर्फ विपक्षी उम्मीदवार थे, तो कहीं कोई भी नहीं था। भाई-भतीजावाद का आलम यह रहा कि चिनावाट ने अपने साले को ही सत्ता की बागडोर सौंप दी।
बैंकाक के हवाई अड्डों की घेराबंदी समाप्त होने के बाद तीन हफ्ते से वहां उड़ान शुरू होने के इंतजार में फंसे तकरीबन तीन लाख यात्रियों ने राहत की सांस ली है। दूसरी ओर विपक्षी ‘पीपुल्स एलायंस फॉर डेमोक्रेसी’ के प्रदर्शनकारियों के प्रधानमंत्री के कार्यालय पर बम विस्फोट के बाद वहां की स्थिति लगातार खतरनाक होती गई।
सत्ता समर्थक लगातार यह धमकियां दे रहे थे कि यदि अदालत उनके खिलाफ फैसला देता है तो वे अदालत का घेराव करेंगे, जिससे थाईलैंड और बड़े राजनीतिक संकट उत्पन्न होने की आशंका थी। इस राजनीतिक उथल-पुथल के कारण इंडो-एशियन शिखर बैठक स्थगित की जा चुकी है, जिसमें भारतीय प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की मौजूदगी में महत्वाकांक्षी आसियान मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर होना था। उम्मीद की जाना चाहिए 2009 प्रतीक्षित चुनाव के बाद थाईलैंड में लोकतंत्र को मजबूती मिल सकेगी।