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है बहुत अंधियारा अब सूरज निकलना चाहिए

इंदौर. गुरुवार शाम इंदौर के कई रंगकर्मी जगदाले सभागृह पहुंचे, यहां उन्होंने हमलों में मारे गए लोगों के प्रति संवेदनाएं तो व्यक्त की ही साथ ही नाट्य संस्था नेपथ्य ने मुंबई कांड से आहत लोगों पर एक नाटक के मंचन की घोषणा भी की।

शाम 7 बजे रंगकर्मी जगदाले सभागृह पहुंचे और हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। आतंकवाद के खिलाफ शहर के लोगों ने स्वेच्छा से जो मुहिम चलाई है, उसमें अब शहर का हर वर्ग आगे आकर भागीदारी दिखा रहा है। रंगकर्मियों ने मृतकों की याद में दो मिनट का मौन रखा व मोमबत्तियां जलाकर ईश्वर से प्रार्थना की। रंगकर्मियों ने हमलों की तीखी आलोचना की और प्रण लिया कि कला के माध्यम से आतंक का पुरजोर विरोध करेंगे।

जैसे अपने दुनिया छोड़ गए.
रंगकर्मी सुशील जौहरी ने कहा ऐसा लग रहा है कि मेरे अपने दुनिया छोड़ गए हों। यह किसने किया, कैसे किया यह महत्वपूर्ण नहीं है, जरूरी है यह जानना कि यह शर्मनाक हरकत क्यों की गई है। किरण शानी ने कहा देश में सभी तरह की सुरक्षा व्यवस्था फेल हो चुकी है। दूसरे देश के आतंकियों को हमारे शहरों की पूरी जानकारी है, वे अंदर तक पहुंच चुके हैं। हमले में आम लोग मर जाते हैं लेकिन जेड श्रेणी वाला नहीं मरता। हमें सोचना होगा कि कब तक इसे सहन करें। योगेंद्र जोशी ने बताया कब तक रुकेगा यह सिलसिला। कला के माध्यम से हमें आक्रोश प्रकट करना चाहिए। जो शहीद हुए हैं उनके लिए अपने जज्बे को व्यक्त करें। इदरिस खत्री ने कहा इस्लाम में बदला लेने के लिए लोगों की जान लेने की मनाही है।

महात्मा बम का मंचन
नेपथ्य ने एक नाटक महात्मा बम के मंचन की घोषणा की। इस नाटक में एक युवा है जो अहिंसा से विश्वास उठने पर हिंसा का सहारा लेता है और मानव बम बनकर खत्म हो जाता है। उसकी मौत राजनीतिक दलों पर सवाल खड़ा कर देती है। जिस तरह से भी हो यह मौसम बदलना चाहिए, फंस गया है भेड़ियों के झुंंड में कोई हिरण, अब तो हरेक आंख से आंसू निकलना चाहिए।





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