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..फिर भी निगम घुटनों के बल

इंदौर. नगर निगम में कम्प्यूटराइजेशन की जिम्मेदारी निगम प्रशासन ने दिसंबर २क्क्६ में एलबिज सिस्टम प्रा.लि. को सौंपी थी। पांच साल के लिए हुए अनुबंध को दो साल भी पूरे नहीं हुए और अनुबंध की अनदेखी को लेकर दोनों पक्षों में तनातनी मई २क्क्८ से ही जारी है। कंपनी का दावा है कि प्रशिक्षण देने के बाद भी नगर निगम के कर्मचारियों ने कम्प्यूटर ऑपेटिंग में रुचि नहीं ली।

अनुबंध के विपरीत जेब से वेतन देकर अपने ऑपरेटर्स से काम लेना पड़ रहा है जिससे कंपनी को हर महीने लाखों का फटका लग रहा है। नुकसान से बचने के लिए अपर आयुक्त और जोनों पर कार्यरत बिल कलेक्टर्स को लॉगिन एड्रेस और पासवर्ड देकर ऑपरेटर्स की संख्या में कटौती करना पड़ी। मई से नवंबर के बीच सौ से अधिक पत्र जारी किए लेकिन निगमकर्मियों ने ऑपरेटिंग शुरू नहीं की।

दूसरी ओर कंपनी के दावों से निगम प्रशासन इत्तेफाक नहीं रखता। उसका कहना है कि व्यवस्था पर कंपनी का एक तरफा कब्जा है। तमाम हिदायतों के बावजूद लॉगिन एड्रेस और पासवर्ड संबंधित कर्मचारियों को देने के बजाय ऑपरेटर्स उन्हें काम के लिए आगे-पीछे घुमा रहे हैं। अपने ही संस्थान में गैर होकर रह चुके निगमकर्मियों के लिए काम करना मुश्किल हो चुका है। अब वे कंपनी को हटाने तक की मांग करने लगे हैं।

क्या था अनुबंध
ठ्ठ निगम और कंपनी के बीच हुए अनुबंध के अनुसार मई 2008 तक मॉड्यूल तैयार करने और ऑपरेटिंग के साथ निगम कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने की जवाबदारी कंपनी की थी। बदले में उसे ४.५ लाख रुपए मिलना थे। कंपनी ने 50 ऑपरेटर्स से काम लिया।
ठ्ठ मई 2008 से कंपनी का भुगतान ४.५ से काटकर ३.५ लाख रुपए महीना कर दिया। बावजूद इसके कंपनी को कर्मचारियों की संख्या बरकरार रखना पड़ी।

क्या है गड़बड़
>> आपसी सहमति के बाद कंपनी ने निगमकर्मियों को तीन महीने का अतिरिक्त प्रशिक्षण तो दिया ही बगैर अतिरिक्त भुगतान के अब तक ऑपरेटिंग की बागडोर भी थामे रखी है।
>> निगमकर्मियों को जल और संपत्ति कर के ५७ हजार खातों की इंट्रियां करना थी वह कंपनी के ऑपरेटर्स ने की।

कंपनी का दखल कम करने की तैयारी
कंपनी पर एकाधिकार का आरोप लगाते हुए निगम के राजस्व और आईटी अधिकारियों ने कंपनी की दखल कम करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस संबंध में बतौर विकल्प निजी ऑपरेटर्स रखे जाने की योजना है। यह ऑपरेटर्स कंपनी से पंद्रह दिन का प्रशिक्षण लेकर छह महीने तक काम करेंगे। व्यवस्था में सुधार आने पर इनकी सेवाएं बढ़ाई जा सकती हैं। अफसरों के अनुसार नई व्यवस्था के बावजूद ढर्रा वही रहा तो निगम के उन अधिकारी-कर्मचारियों पर भी गाज गिरना तय है जो कंपनी पर आरोप लगाकर अपनी कामचोरी पर पर्दा डालने की कोशिश में लगे हैं।

निगम की खामियां गिनाना काफी नहीं
निगमकर्मियों ने प्रशिक्षण में रुचि नहीं ली। इसकी जानकारी कंपनी को प्रशिक्षण सत्र के दौरान आयुक्त को देना थी, आज नहीं। ऐसा होने पर अनुबंध में संशोधन करवाते हुए ऑपरेटर्स की अवधि बढ़ाने या निगम द्वारा अपने स्तर पर ऑपरेटर्स की नियुक्ति कराने की जवाबदारी भी कंपनी की थी। कंपनी ऐसा करने के बजाय खामियां निकालने में व्यस्त और लोग परेशान होते रहे। निगम ऑपरेटर्स रखकर जोन की व्यवस्था उनके हाथों सौंपने की तैयारी में है।
-केदार सिंह, अपर आयुक्त राजस्व

कंपनी से निगम की दिक्कतें> >> बार-बार कहने के बाद भी बकायादारों की सूची नहीं दी।
>> बिल या प्रमाण-पत्रों की अशुद्धियों के सुधार में आनाकानी।
>> वक्त पर बिल प्रिंट नहीं हो पाते।
>> रिकॉर्ड व्यवस्थित नहीं है।

कब-कब लिखे पत्र
पहला पत्र- 19 मई 2008 को लॉगिन-पासवर्ड लेने के लिए निगमकर्मियों को १ जून को बुलाया गया।
1 जून 2008 को कर्मचारियों को बुलाया था लेकिन वे आए ही नहीं।
2 जून 2008 को लॉगिन-पासवर्ड वाले नौ बंद लिफाफों के साथ अपर आयुक्त को पत्र लिखा जिसमें कंपनी ने स्पष्ट कर दिया मॉड्यूल हैंडओवर करने के लिए इनका उपयोग जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो कम्प्यूटर द्वारा दी जानी वाले सुविधाएं प्रभावित होंगी जिसका खामियाजा निगम के साथ शहरवासियों को भुगतना पड़ सकता है।
9 जून 2008 को आयुक्त, अपर आयुक्त आईटी, राजस्व अधिकारी सहित सभी जोनों को क्रमांक- ४९८८ से 5046 के बीच ५९ पत्र जारी किए। सभी को लॉगिन-पासवर्ड की जानकारी दी गई।

नाकाम रही कोशिशें
एलबिज सिस्टम प्रा.लि. के प्रवीण व्यास ने बताया मई से लॉगिन-पासवर्ड देने की कोशिश कर रहे हैं जो नाकाम रहीं। तमाम पत्र बेअसर साबित हुए बतौर खामियाजा अनुबंध के अनुसार हम ऑपरेटर्स नहीं हटा सके। यदि निगमकर्मियों ने लॉगिन-पासवर्ड लेकर ऑपरेटिंग शुरू नहीं की तो व्यवस्था पूरी तरह चरमराकर ध्वस्त हो जाएगी।





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