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इंदौर. रीगल चौराहे पर बीच सड़क पर पड़े एक छोटे से हरे रंग के बैग को देखकर यातायात पुलिस का कांस्टेबल अनिल कुमार वेनवंशी रुका। उसे शंका हुई कि इस बैग में बम तो नहीं है जिसे उसने लात मारकर देखा। जब लात मारी तो बैग कुछ दूर जाकर गिरा।
कांस्टेबल ने बैग खोलकर देखा तो उसमें 20 हजार रु. और 50 हजार तथा 6 हजार सात सौ रुपए के हस्ताक्षर किए हुए दो चेक रखे थे। बैग प्यूरेक्स फॉर्मास्युटिकल लि. के अरविंद अजमेरा का था जो गिर गया था। वे शाम को ट्रैफिक थाने पर लेने पहुंचे।
सुबह 11.45 बजे हुई इस घटना के बाद अनिल दंग रह गया। उसने तत्काल वायरलेस सेट पर कंट्रोल रूम को सूचना दी जिसके कुछ ही देर बाद तुकोगंज थाने से एन.डी. यादव कांस्टेबल अनिल के पास पहुंचे और उससे बैग लिया। अनिल ने ‘भास्कर’ को बताया मेरी ड्यूटी गीताभवन चौराहे पर थी। मैं अपने डीआरपी लाइन स्थित निवास से ड्यूटी पर जा रहा था तभी मेरी नजर बैग पर पड़ी।
मुंबई की आतंकी घटना से मुझे आशंका हुई कि कहीं इसमें बम तो नहीं। मैंने यातायात रुकवाया ताकि कोई जनहानि न हो। इसके बाद लात मारकर देखा तो नोट भरे होने की जानकारी मिली। यदि बम होता तब क्या होता? अनिल से पूछने पर उसका कहना था मैं मर जाता किंतु दूसरे लोगों को नुकसान तो नहीं होता।