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इंदौर. इंदौर के एक व्यापारी को महाराष्ट्र से आए फोन कॉल्स ने पुलिस की नींद उड़ा दी। फोन करने वालों ने खुद को इंडियन मुजाहिदीन का बताते हुए रेलवे स्टेशन को बम से उड़ाने की धमकी दी। पुलिस ने मामले की तहकीकात की तो फोन करने वाले महाराष्ट्र के दो छात्र निकले। दोनों को महाराष्ट्र पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस पूछताछ में दोनों ने बताया कि फोन मजाक में किया था।
पागनीसपागा में रहने वाले राजू उर्फ दविंद्र सिंह छाबड़ा के मोबाइल पर मंगलवार को महाराष्ट्र के नंबर से फोन आया। बाहर का नंबर देखकर श्री छाबड़ा ने फोन नहीं उठाया। थोड़ी देर बाद फिर से उसी नंबर से मिस कॉल आया। उस नंबर पर जब फोन लगाया तो सामने वाले ने खुद का नाम आकाश बताते हुए पूछा कि अगला ब्लास्ट कहां करना है। यह सुनते ही श्री छाबड़ा घबरा गए। उन्होंने अपने भाई हरमिंदर को यह बात बताई। कुछ ही देर बाद दोबारा उसी नंबर से फोन आया। इस बार फोन हरमिंदर ने उठाया।
फोन करने वाले ने पूछा कि अगला ब्लास्ट कहां करना है, तो हरमिंदर ने पूछा कि कौन बोल रहे हो, इस बात का क्या मतलब। वैसे ही देश का माहौल खराब चल रहा है, इस तरह की बात क्यों कर रहे हो। तो फोन करने वाले ने कहा कि उनके मोबाइल से उसे एसएमएस किया गया था। इसके बाद उसने फोन काट दिया। इसके बाद दोनों भाई थाना रावजीबाजार पहुंचे। टीआई शैलेंद्रसिंह बैस से शिकायत की। टीआई उनसे पूछताछ कर ही रहे थे कि फिर से फोन आ गया। इस बार टीआई ने एसआई दुबे को फोन दे दिया। उन्होंने जैसे ही फोन उठाकर अंग्रेजी में बात की तो सामने वाले ने फोन काट दिया। आवेदन देकर वे घर लौट आए।
एसपी बोल रहा हूं
घर आने के बाद दो-तीन बार फोन आया। श्री छाबड़ा ने लगाया तो सामने से फोन नहीं उठाया गया। आखिर में फोन आया तो हरमिंदर ने बात की। उन्होंने फोन करने वाले को समझाया कि थाने पर शिकायत कर दी है। तो उसने कहा कि आपके मोबाइल से एसएमएस आया था, जिसमें ब्लास्ट करने को कहा गया। तब हरमिंदर ने कहा कि ऐसा कोई एसएमएस आया है तो वे पुलिस या एसपी को शिकायत करें। इस पर फोन करने वाले ने कहा कि वह एसपी बोल रहा है। तब हरमिंदर ने यह कहकर फोन काट दिया कि अगर आप एसपी बोल रहे हो तो हमारे एसपी से बात कर शिकायत करो।
एसपी तक पहुंचा मामला
इस फोन के बाद हरमिंदर ने सीधे एसपी को फोन लगाकर पूरा मामला बताया। उन्होंने सीएसपी संजयसिंह और डीएसपी क्राइम राजेश व्यास को जांच के निर्देश दिए। अधिकारियों ने दोनों भाइयों को सीएसपी ऑफिस बुलवाया। वहां उनके बयान लिए। जिन नंबरों से श्री छाबड़ा को फोन आ रहे थे, वे महाराष्ट्र के थे इसलिए नंबर महाराष्ट्र पुलिस कंट्रोल रूम को नोट करवा दिए गए साथ ही दोनों भाईयों को फोन न उठाने के निर्देश दिए।
अलग-अलग नंबरों से आए थे फोन
फोन करने वाले ने पांच अलग-अलग नंबरों से फोन किए थे। कभी वह केवल मिस कॉल करता, जब इंदौर से फोन लगाया जाता तो उठाता नहीं। पहले वह पूछता रहा कि ब्लास्ट कहां करना है। फिर खुद को इंडियन मुजाहिदीन का बताकर स्टेशन पर ब्लास्ट करने की धमकी दी।
महाराष्ट्र से आईजी का फोन आया
इंदौर पुलिस से मामले की जानकारी मिलने के बाद महाराष्ट्र से आईजी श्री सिद्धु का फोन इंदौर आरपीएफ को पहुंचा। उन्होंने आरपीएफ से मामले की जांच करने के साथ श्री छाबड़ा के बयान लेने को कहा। इसके बाद एसआई फर्नाडीस एसपी ऑफिस और श्री छाबड़ा के घर पहुंचे।
मजाक में किया था फोन
महाराष्ट्र पुलिस नंबरों की जांच करवाने के बाद सांगली के सातगांव में रहने वाले तीन छात्रों तक पहुंची। तीनों छात्र 11 व 12वीं में पढ़ते हैं। महाराष्ट्र पुलिस ने दो छात्रों को तो हिरासत में ले लिया, मगर तीसरा हाथ नहीं आया। महाराष्ट्र पुलिस को पूछताछ के दौरान दोनों छात्रों ने बताया कि उनका एक रिश्तेदार इंदौर में पढ़ाई कर रहा है। उन्होंने मजाक करने के लिए उसे फोन लगाया था, मगर गलती से छाबड़ा का नंबर लग गया। एक बार फोन करने के बाद उन्हें मजा आने लगा तो वे बार-बार फोन लगाने लगे।
माफ कर दो गलती हो गई
दोनों के पकड़े जाने के बाद बुधवार को उनके रिश्तेदार अमोल पिता संभाजी जाधव का फोन श्री छाबड़ा के मोबाइल पर आया। उसने माफी मांगते हुए कहा कि उनके बच्चों को पुलिस ले गई है, उन्होंने मजाक में यह हरकत की थी। उनकी नादानी मानते हुए आप उन्हें माफ कर दें। उस समय आरपीएफ के एसआई फर्नाडीस भी वहीं थे। श्री छाबड़ा ने फोन करने वाले की बात उनसे करवा दी। वह उनसे भी माफी मांग रहा था।
इंदौर लाया जाएगा दोनों को
महाराष्ट्र पुलिस द्वारा पकड़े गए दोनों छात्रों को पूछताछ के लिए इंदौर लाया जाएगा। हालांकि महाराष्ट्र पुलिस ने अब तक दोनों की गिरफ्तारी की आधिकारिक सूचना नहीं दी है। इंदौर पुलिस उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रही है।
पूरे स्टेशन पर हाई अलर्ट
महाराष्ट्र पुलिस ने मामले की जानकारी आरपीएफ को भी दे दी। सूचना मिलते ही इंदौर स्टेशन पर हाई अलर्ट कर दिया गया। स्नाईफर डॉग और मेटल डिटेक्टर से आने-जाने वाली ट्रेनों, सभी प्लेटफॉर्मो के साथ स्टेशन के बाहर खड़ी गाड़ियों की भी जांच करवाई गई। मामले में छात्रों का नाम आने के बाद सभी ने राहत की सांस ली।