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चित्तौड़गढ़. फोर्ट रोड पुस्तकालय मतदान केंद्र में सुबह 11 बजे एक युवती चार परिजनों की मदद से दाखिल होती है। ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे अटकी सांसों के बावजूद वोट डालने की जिद पर अड़ी जया कुमावत को देख वहां मौजूद मतदाता और पोलिंग दल के सदस्य हैरान रह गए।
एक अफसर के आंसू बह निकले तो बाकी सब भी भावुक हो गए। वोट डालकर जया के चले जाने के बाद भी उसकी जिद और जज्बा सकी जुबान पर था। भास्कर ने जब जया से इस बारे में जानना चाहा तो साथ आए परिजन बोल पड़े, बहुत समझाया कि तुम्हारे एक वोट से क्या हो जाएगा, लेकिन नहीं मानी। जया 30 साल की है, जिसे फेफड़ों की बीमारी हो गई है। मुंबई के हिंदुजा अस्पताल तक इलाज हो चुका, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि उसके फेफड़ों का ट्रांसप्लांटेशन होना है।
यह काम सिर्फ अमेरिका में ही संभव है। इस इलाज पर करीब एक करोड़ रुपए का खर्च आने की संभावना बताई जाती है, लेकिन जया के पिता डीएसओ ऑफिस के रिटायर्ड कर्मचारी हैं। जया की शादी भी हो चुकी है, लेकिन वह अपने माता-पिता और भाई-बहनों के साथ ही रहती है।