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जयपुर. दो दिन पहले मां को खोने वाले प्रभुनारायण का उत्साह देखने ही बनता था। उनके जवाब ने हर किसी को आवाक कर दिया। बोले, ‘जीवन-मरण चलता रहेगा, यह राष्ट्रीय पर्व है, भला मैं इस मौके को कैसे चूकता’ प्रेमपुरा (बस्सी) से मदन कलाल मां की मौत को अभी दो दिन ही गुजरे हैं।
परिवार में रुदन का दौर अभी थमा भी नहीं है..लेकिन लोकतंत्र के महोत्सव में उसकी भागीदारी का अंदाज देखने लायक था। खुद ने मतदान किया, फिर परिवार के हर सदस्य से डलवाया वोट।..उत्साह यहीं नहीं थमा और निकल पड़े इलाके में जनता से मतदान की अपील करने।
ये हैं प्रेमपुरा के प्रभुनारायण शर्मा। चुनाव जैसे इनके लिए महोत्सव से कम नहीं। मां के गम को भूल उत्साह से मतदान की अपील करते प्रभु को देख हर कोई आश्चर्य करता रह गया। खुद प्रभु कहते हैं, ‘जीवन-मरण चलता रहेगा, यह राष्ट्रीय पर्व है और भला मैं इस मौके को कैसे चूकता ।’ प्रभु ने बताया कि मां की मौत ने उसे अंदर तक झकझोर दिया, लेकिन चुनाव का नाम लेते ही फिर से जान में जान आ गई। रिश्तेदार-मित्रों के घर पर आने-जाने का दौर चल रहा है, लेकिन प्रभु थे कि दिनभर चुनाव में व्यस्त रहे।
वे कहते हैं, ‘राष्ट्र निर्माण के इस पुण्य धर्म से दूर रहना किसी पाप से कम नहीं।’वे गुरुवार को सवेरे जल्दी उठे। वोट डालने के बाद प्रभु ने अपने परिवार को भी पुण्य कर्म में भागीदारी की अपील की। घर में 95 वर्ष की दादी केसर देवी, 80 वर्षीय पिता सुखराम और बुजुर्ग काका-काकी को वोट डलवाने के लिए भी वे खुद ही ले गए।
आखिर, जिद हो तो ऐसी..
राजपुरा के 80 वर्षीय रामकरण ने दिखाया कि आखिर जिद क्या होती है? कुछ दिन पहले जिप्सी से हुई टक्कर में बुरी तरह घायल हो गए। मौत से बचे रामकरण को डॉक्टर ने लंबे आराम की सलाह दी। गुरुवार को जब बेटा-बहू मजदूरी के लिए गए थे तो पीछे से निकल पड़े वोट डालने। सहारा बनी तो सिर्फ बैसाखी। रामकरण ने बताया कि उन्हें याद नहीं कि पहले कभी वोट डालने का मौका गंवाया हो। इस बार भी अपने वोट को बेकार नहीं होना देना चाहते थे। आखिर, जिद हो तो ऐसी..