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सेफ्टी डिवाइस के बिना बाइक रजिस्ट्रेशन नहीं

ग्वालियर. मोटर साइकिल के रजिस्ट्रेशन को लेकर चल रही दुविधा उच्च न्यायालय जबलपुर के अंतरिम आदेश के बाद खत्म हो गई है। उच्च न्यायालय ने परिवहन विभाग से कहा है कि सेन्ट्रल मोटर व्हीकल्स एक्ट 1989 के नियम 123 का पालन करने पर ही रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी मोटर साइकिलों का रजिस्ट्रेशन करें।

मोटर साइकिल की पिछली सीट पर बैठने वाले की सेफ्टी को लेकर एक जनहित याचिका ज्ञान प्रकाश ने दायर की थी जिसमें सेन्ट्रल मोटर व्हीकल्स एक्ट 1989 के नियम 123 को लागू करने का अनुरोध किया था। न्यायालय ने नवम्बर 2007 में रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दी थी। सुनवाई के बाद न्यायालय ने बीते दिनों नियम 123 पर दिए फैसले के बाद परिवहन आयुक्त को निर्देश दिए हैं कि मोटर साइकिलों का रजिस्ट्रेशन तभी हो, जब मोटरसाइकिल निर्माता कंपनियां बाइक में सेफ्टी डिवाइस लगाएं।

इस आदेश के बाद सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मेन्यूफेक्चर्स ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली है। इधर परिवहन आयुक्त एनके त्रिपाठी ने सभी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि उच्च न्यायालय के आदेश का पालन किया जाए। उन्होंने शासन को पत्र भेजा है कि एक्ट में संशोधन पर विचार किया जाए।

ये है मामला : याचिकाकर्ता ने सेन्ट्रल मोटर व्हीकल्स एक्ट के नियम 123 को लेकर वर्ष 2006 में याचिका दायर की थी। उसमें मोटर साइकिल की पीछे की सीट पर बैठने वाली सवारी के लिए सेफ्टी डिवाइस लगाने के लिए आदेश देने का अनुरोध था। आठ अक्टूबर 2008 से प्रदेश में रजिस्ट्रेशन बंद हो चुके हैं।

ये चाहिए सुविधा
मोटर साइकिल की पिछली सीट पर बैठने वाले व्यक्ति की सुविधा को ध्यान में रखते हुए निर्माता कंपनियों को हैंड ग्रिप, क्लॉथ गार्ड (दोनों तरफ) व फुट रेस्ट (दोनों तरफ) लगाना पड़ेंगे।

- उच्च न्यायालय ने आदेश दिए हैं कि प्रदेश में सीएमवी एक्ट के नियम 123 का पालन करने के बाद ही मोटर साइकिल का रजिस्ट्रेशन किया जाए। सभी आरटीओ को पत्र भेज कर कहा गया है कि न्यायालय के आदेश का पालन हो। प्रदेश में मोटर साइकिल के रजिस्ट्रेशन रुक जाने से हर महीने सात करोड़ रुपए का राजस्व नहीं मिल पा रहा है।
- एनके त्रिपाठी, आयुक्त परिवहन विभाग





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