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मंडल का विखंडन विकास विरोधी

रायपुर. छत्तीसगढ़ विद्युत अभियंता संघ ने मंडल के विखंडन संबंधी विद्युत अधिनियम 2003 का विरोध किया है। संघ के महासचिव पीएन सिंह ने कहा है कि विद्युत मंडल का विखंडन किसान विरोधी और प्रदेश की जनता के साथ धोखाधड़ी है। इससे विद्युत दरों में बढ़ोतरी होगी जिसे जनता कभी सहन नहीं करेगी।

श्री सिंह ने कहा कि जिस विद्युत अधिनियम 2003 के तहत आंध्रप्रदेश मंडल के विखंडन की सफलता की कहानी सुनाई जाती है, वहां बढ़ी हुई बिजली दरों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। विखंडन के पश्चात गठित आंध्र की बिजली उत्पादन कंपनी वर्तमान में दिवालिएपन के कगार पर है। विद्युत मंडल के विखंडन के पैरोकार झूठी एवं मनगढ़ंत बातें बताकर प्रदेश की जनता के साथ एक तरह से धोखाधड़ी कर रहे हैं। प्रदेश के हित में ऐसे जनता व किसान विरोधी तत्वों से सावधान रहना होगा। छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल को वर्तमान स्वरूप में बनाए रखने में ही प्रदेश की दो करोड़ जनता की भलाई होगी।

श्री सिंह ने बताया कि उन सभी राज्यों उड़ीसा, प. बंगाल, मप्र, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक व दिल्ली में जहां विद्युत मंडल का विखंडन बंद कर दिया गया है, वहां कृषि पंपों के ऊर्जीकरण में विद्युत मंडलों ने अपना योगदान देना बंद कर दिया है। लेकिन जिन राज्यों पंजाब, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, झारखंड, बिहार, केरल, मेघालय, छत्तीसगढ़ व जम्मू-कश्मीर में जहां विद्युत मंडल का विखंडन नहीं किया है, वहां कृषि पंपों के ऊर्जीकरण के लिए मंडल अपनी ओर से लाइन विस्तार पर राशि खर्च कर रहे हैं। कुल मिलाकर विद्युत मंडल का विखंडन किसान विरोधी है।

..जब अमेरिका ने दी थी धमकी
श्री सिंह ने कहा कि यदि इसी तरह किसानों के विरोध में काम होता रहा तो देश की अन्न सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। हमें 1965 से 1967 तक का अमेरिकी लाल गेहूं को नहीं भूलना चाहिए। जब भारत ने वियतनाम हमले का विरोध किया था, तो अमेरिका ने हमें अनाज न देने की धमकी दी थी। बिजली की समस्या देश की अस्मिता से जुड़ी हुई है। बिजली को बाजार की वस्तु बनाकर देश की अस्मिता से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए।





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