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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. दुनियाभर की मंदी की आंच से छत्तीसगढ़ भी नहीं बच सका है। राज्य के उद्योग मंदी की जबरदस्त मार झेल रहे हैं। हालात से निपटने के लिए उद्योगपतियों ने अस्थायी तौर पर कुछ यूनिटों में ताला लगा दिया है। कुछ उद्योगपतियों ने अपनी यूनिटों में काम के घंटे कम करके उत्पादन घटाया है। 24 घंटे चालू रहने वाले उद्योगों में 12 घंटे की कटौती कर दी गई है। 12 घंटे चलने वाली मशीनों को 4-6 घंटे चलाकर यूनिटों को जिंदा रखा गया है।
टायर उद्योग का बुरा हाल : सिलतरा में राज्य का इकलौता टायर उद्योग है। क्लासिक साइकिल टायर के नाम से उत्पादन करने वाली कंपनी ने फिलहाल अपना उत्पादन 50 प्रतिशत कम कर दिया है। मंदी का दौर शुरू होने के पहले तक उद्योग की चार यूनिटों में उत्पादन चल रहा था। तीन महीने से दो यूनिट बंद कर दी गई है। शेष दो यूनिटों में उत्पादन चल रहा है। इसमें भी कुछ कटौती की गई है। कंपनी साढ़े 3500 टायर प्रतिदिन बनाती थी। अभी 1000 टायर ही बन रहे हैं। कंपनी के मुताबिक डिमांड के अनुसार ही उत्पादन कम किया गया है। मंदी के कारण पिछले चार महीनों में 35 लाख से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।
साइकिल पार्क का प्रोडक्शन घटा : प्रदेश में साइकिल पार्क भी एक ही है। उरला स्थित साइकिल पार्क में रिंग, स्पोक और स्टैंड तैयार किए जाते हैं। बाजार ठंडा होने के कारण इसका प्रोडक्शन भी आधे से कम कर दिया गया है। पार्क में काम के घंटे कम करके इस नुकसान की भरपाई की जा रही है। मजदूरों से पहले 8-8 घंटे काम लिया जाता था। अभी केवल 4-4 घंटे की दो शिफ्टों में सेवाएं ली जा रही है।
लोहा उद्योग ठंडा-ठंडा : मंदी ने आयरन इंडस्ट्रीज, रोलिंग मिल और मिनी स्टील प्लांट की कमर तोड़कर रख दी है। एक अनुमान के मुताबिक इन उद्योगों को अभी तक करोड़ों का नुकसान हो चुका है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि उद्योगपतियों ने कुछ यूनिटों को बंद कर दिया है। कुछ यूनिटें बंद होने की कगार पर हैं। बढ़ते हुए घाटे से बचने के लिए उत्पादकों ने प्रोडक्शन कम कर दिया है। माल की लागत कम करने के लिए छंटनी तक कर दी गई है।
उद्योगपतियों का दावा है कि दो-तीन महीने में लोहे की मांग में 30 प्रतिशत की कमी आ चुकी है। इसका असर कीमतों पर पड़ा है। 40 प्रतिशत तक कीमतें घटी हैं। उद्योगपति नुकसान के अंदेशे से स्टाक तक नहीं रख रहे हैं।
स्पंज आयरन को तगड़ा झटका : स्पंज आयरन उद्योग मंदी के इस दौर से लड़खड़ा गया है। राज्य में स्पंज आयरन की तेजी के कारण 100 से ज्यादा छोटी-बड़ी मिलें खुल गई थीं। लगातार मंदी की मार झेल रहे स्पंज आयरन के उद्योगपतियों ने उत्पादन 50 प्रतिशत से भी ज्यादा घटा दिया है। पहले कर्मचारियों की छंटनी करके लागत को कम करने प्रयास किया गया। पर इससे बात नहीं बनी तो उत्पादन में कटौती की गई है।
फेरो एलाय प्लांट में ताले
फेरो एलाय प्लांट पूरी तरह बिखरने के कगार पर है। 10 प्लांट में से अब तक दो-तीन में ताले लग चुके हैं। जिन प्लांट में प्रोडक्शन चालू है वे भी बंद होने की स्थिति में पहुंच चुके हैं। हालात से निपटने के लिए प्रोडक्शन 30-35 प्रतिशत किया जा चुका है। रोलिंग मिलों की स्थिति भी तकरीबन ऐसी ही है। उद्योगों ने उत्पादन घटाने के साथ-साथ काम के घंटे कम कर दिए हैं। ओवर टाइम पूरी तरह बैन कर दिया गया है। श्रमिकों की छंटनी तक की, लेकिन स्थिति काबू में नहीं आ रही है।
सुस्त है रियल इस्टेट
बिल्डर्स और प्रापर्टी डेवलपर्स के अनुसार रियल इस्टेट में धीमापन है। जानकार इसे आंशिक मंदी कह रहे हैं। लोकल बिल्डरों का कहना है कि देश के अन्य शहरों की तुलना में छग में हालात अलग हैं। यहां अपेक्षा से ज्यादा निर्माण नहीं किया गया है। बेहद कम प्रोजेक्ट लांच हुए हैं। शहरों में फ्लैट और कालोनियों की अच्छी बुकिंग हुई है। अलबत्ता ऊंची ब्याज दरों के कारण प्रापर्टी लोन की मांग में 25 से 30 प्रतिशत की कमी आई है।
हर परिस्थिति पर नजर-सचिव : राज्य उद्योग विभाग के सचिव पी. रमेश कुमार का कहना है कि यह समस्या पूरे देश में एक समान है। राष्ट्रीय स्तर पर ही पालिसी तय होगी। इसके बावजूद उद्योग विभाग की छग के हालात पर नजर है। कौन-कौन से उद्योग पूरी तरह बंद हो चुके हैं और कितने कर्मियों को निकाला जा चुका है, इसका आंकलन एक-दो दिन में किया जाएगा। उत्पादन की गिरावट पर भी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। उसी रिपोर्ट के आधार पर भविष्य के लिए योजना बनायी जाएगी।
बिलासपुर में स्थिति जुदा नहीं
बिलासपुर के सिरगिट्टी औद्योगिक क्षेत्र में भी मंदी की मार पड़ी है। अलबत्ता एसोसिएशन के हरीश केडिया का कहना है, अभी हालात की जानकारी ली जा रही है।
क्या कहते हैं उद्योगपति
साइकिल और टायर उद्योग ही नहीं सभी तरह के उत्पादों पर गहरा झटका पड़ा है। राज्य के सभी उद्योगों की हालत खराब है। नुकसान से बचने के लिए उत्पादन में कटौती की जा रही है। फिलहाल उद्योगों को जीवित रखने के लिए यही एक फामरूला नजर आ रहा है। बाजार फिर से करवट लेने के संकेत दे रहा है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही हालात बदलेंगे।
-महेश कक्कड़, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ उद्योग महासंघ
लोहा उद्योग दोहरी मार झेल रहा है। एक तरफ लोहे की कीमतें काफी कम हो गई हैं, दूसरी ओर रा मटेरियल अभी भी महंगा है। इस ओर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है अन्यथा प्रदेश के विकास पर असर पड़ेगा।
-अनिल नचरानी, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ स्पंज आयरन उद्योग एसोसिएशन