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अब महंगी पड़ेगी सफेदी की चमकार

बिलासपुर. बाजार में ब्रांडेड उत्पादों की बढ़ी दोगुनी कीमतों ने घर-गृहस्थी की मुश्किलें बढ़ा दी है। घरेलू सामान के जरूरी हिस्से डिटर्जेट उत्पादों के लिए अब उन्हें निर्धारित बजट में डेढ़ से दोगुना वृद्धि करनी होगी। हालांकि सभी उत्पादों में ऐसी स्थिति नहीं है और बाजार कहीं नरम, कहीं गरम है।

कितने बढ़े दाम- बाजार में कंपनियों ने उत्पादों के या तो दाम बढ़ा दिए हैं या फिर उत्पादों की क्वांटिटी घटा दी है। बढ़ी हुई कीमतों में ब्रांडेड कंपनियों के 1 किलो वाले डिटर्जेट पावडर जिनका मूल्य 100 से 110 रुपए मूल्य था उनका वास्तविक मूल्य अब 140 से 150 रुपए हो गया है। बाजार में मध्यम वर्ग के लिए अधिक प्रचलित ब्रांडो में ऐसे डिटर्जेट जिनकी कीमत प्रति किलो 20 रुपए थी उनका वास्तविक मूल्य अब 35 रुपए से बढ़कर 40 रुपए हो गया है।

किराना व्यावसायी इन्द्र मनचंदा के मुताबिक कंपनियों ने यहीं बस नही किया, उन्होंने कई डिटजेर्ंट साबुनों की मात्रा घटाकर कीमत यथावत रखी है। अन्य उत्पादों पर नजर डालें तो तेल बाजार में मंदी का कारण पाम आयल को माना जा रहा है। लगातार तेल की कीमत कम होने से आम लोगों ने जरूर राहत की सांस ली है। तेल में प्रतिकिलो दाम 15 से 20 रुपए तक कम हुए हैं और वर्तमान में प्रतिकिलो 55 से 60 रुपए किलो तेल बिक रहा है।

पाम आयल की व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में सर्वाधिक मांग होने के कारण फिलहाल अन्य तेल उत्पादों की डिमांड नहीं के बराबर है जिसके कारण उनकी कीमतें गिर रही है। सब्जी बाजार में में आलू की नई फसल आने में अभी एक सप्ताह की देर है लेकिन बाजार में आलू का दाम अभी से कम हो गया है। चिल्हर बाजार में आलू अभी 5 रुपए किलो बिक रहा है। वहीं अन्य सब्जियों के भाव भी कम हो गए हैं।

स्टील बाजार में डिमांड नहीं होने के कारण फिलहाल बाजार ठंडा है। कभी 45 रुपए प्रतिकिलो बिकने वाला लोहा 34 से 35 रुपए प्रतिकिलो में बिक रहा था लेकिन वर्तमान में प्रतिकिलो लोहे के भाव दो रुपए तक घट गए हैं और डिमांड नहीं होने से दाम और कम होने की बात कारोबारियों द्वारा कही गई है।





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