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डीएनए टेस्ट से न्याय की आस

डोंगरगांव. ब्लाक के ग्राम सुखरी में सात साल पहले हुए बलात्कार के मामले में इंसाफ मांगती घूम रही युवती को अब कहीं जाकर न्याय की उम्मीद दिख रही है। पुलिस ने उसके बच्चे छोटू (6) और आरोपी लोकेश यादव का डीएनए टेस्ट करवाया था, जिसमें बलात्कार की पुष्टि हो गई। गुरुवार को अदालत ने आरोपी को 10 दिसंबर तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। राजनांदगांव जिले के गेंदाटोला इलाके में दो साल पहले हुए बलात्कार के ऐसे ही एक अन्य मामले की जांच पुलिस डीएनए टेस्ट के माध्यम से कर रही है।

पीड़ित युवती का आरोप है कि गत सितंबर 2001 में गांव में रहने वाले लोकेश ने शादी का वादा कर उसके साथ बलात्कार किया। जब वह गर्भवती हो गई, तो आरोपी शादी से मुकर गया। युवती के परिजनों के आग्रह पर गांव में बैठक भी हुई थी, जिसमें पंचों के सामने लोकेश ने युवती को अपनाने से इनकार कर दिया। 17 साल की युवती ने परिजनों के साथ थाने से लेकर तत्कालीन मंत्रियों तक फरियाद की। कार्रवाई तो दूर, उसकी शिकायत पर डोंगरगांव थाने में एफआईआर तक नहीं लिखी गई। बताया जाता है कि आरोपी का भाई उस समय पंचायत में पदाधिकारी था।

थाने में रिपोर्ट नहीं लिखे जाने की बड़ी वजह यही बताई जा रही है। कुछ दिनों बाद युवती के बड़े भाई की संदिग्ध परिस्थिति में हत्या हो गई। परिजनों का कहना है कि अपनी बहन के साथ हुए अनाचार से दुखी भाई लोकेश से बातचीत करने घर से निकला था। उसके बाद वह जिंदा नहीं लौटा। कई दिनों तक लापता भाई की लाश गांव के कुएं में मिली।

हत्या के बाद उसकी लाश को पत्थरों से बांधकर कुएं में फेंक दिया गया था। पुलिस ने हत्या का अपराध तो कायम किया, पर जांच में आरोपियों का सुराग नहीं मिलने के आधार पर फाइल बंद कर दी गई। न्याय के लिए भटकती युवती ने इस बीच एक बेटे छोटू को जन्म दिया, जो आज पहली कक्षा में है। युवती गत 15 जुलाई को परिजनों के साथ राजनांदगांव में एसपी वीके चौबे से मिली थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने मामले की जांच शुरू करवाई।

आरोपी, महिला और बच्चे के डीएनए को परीक्षण के लिए कोलकाता फोरेंसिक लैब भेजा गया। गत 3 दिसंबर को अपराध की पुष्टि होते ही डोंगरगांव पुलिस ने लोकेश को गिरफ्तार कर लिया। डोंगरगांव थाने के प्रभारी राजेश जॉन ने बताया कि लोकेश को गुरुवार को राजनांदगांव कोर्ट में पेश किया गया।

थानेदार के खिलाफ जांच शुरू
एसपी विनोद कुमार चौबे ने बताया कि बलात्कार की घटना के समय डोंगरगांव थाने के प्रभारी रहे एएस त्रिपाठी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। जांच के तहत उन्हें आरोप पत्र भेजा जा चुका है। युवती के भाई की हत्या के मामले की फाइल दुबारा खोली जा रही है। प्रकरण की अब नए सिरे से जांच की जाएगी। जिले के गेंदाटोला इलाके में बलात्कार का ऐसा ही एक और मामला सामने आया है, जिसमें पुलिस ने डीएनए टेस्ट करवाया है। रायपुर में पदस्थ शासकीय फोरेंसिक एक्सपर्ट सुनंदा ढेंगे का कहना है कि इस तरह के मामले में डीएनए टेस्ट कारगर सबूत होता है। बलात्कार के आरोपियों का पता लगाने के लिए डीएनए टेस्ट किए जाने के मामले पहले भी हो हुए हैं।





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