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‘मुझे कानूनी सहायता दो साथी की लाश ले जाओ’

मुंबई/नई दिल्ली. मुंबई हमलों के मामले में एकमात्र गिरफ्तार आतंकी मोहम्मद आमिर ईमान कसाब ने पाकिस्तान के वाणिज्य दूतावास को पत्र लिखकर कानूनी मदद मांगी है। उसने पुलिस मुठभेड़ में मारे गए अपने सहयोगी अबू इस्माइल खान के शव को भी पाक ले जाने को कहा है।

मुंबई पुलिस के संयुक्त आयुक्त राकेश मारिया ने शनिवार को यहां पत्रकारों को बताया कि कसाब के पत्र को आगे की कार्रवाई के लिए भारतीय विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय को भेज दिया गया है। दिल्ली स्थित पाक के वाणिज्य दूतावास ने फिलहाल ऐसे किसी पत्र के प्राप्त होने से इनकार किया है।

वाणिज्य दूतावास के प्रवक्ता ने कहा, ‘हमें कोई पत्र नहीं मिला।’ गौरतलब है कि पाकिस्तान ने अभी तक भारत के इस दावे को नामंजूर किया है कि कसाब पाक नागरिक है जबकि पाकिस्तान के फरीदकोट गांव निवासी कसाब के पिता भी यह स्वीकार चुके हैं कि कसाब उनका ही बेटा है।

पैरवी की पहल : एक सामाजिक संगठन ने कसाब के मामले की कोर्ट में पैरवी करने की पहल की है। संगठन का कहना है कि किसी को भी उसके बचाव के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है।

सरावगी भी पीछे हटे: महानगर के क्रिमिनल मामलों के वकील अशोक सरावगी ने अजमल का मुकदमा लड़ने से इनकार कर दिया है। पहले हर आरोपी को कानूनी मदद के अधिकार की बात कहने वाले सरावगी ने पीछे हटने का कारण नहीं बताया है। सरावगी इससे पहले 1993 मुंबई ब्लास्ट मामले में माफिया डॉन अबू सलेम के वकील रह चुके हैं।

मां से लिया था आशीर्वाद : इस्लामाबाद. मोहम्मद आमिर ईमान कसाब ने मुंबई हमलों से करीब पांच माह पहले पाक के ओकारा जिले में स्थित फरीदकोट गांव में अपनी मां से मुलाकात कर ‘जेहाद’ में कामयाबी का आशीर्वाद लिया था। ‘जिओ टीवी’ चैनल ने कसाब के गांव वालों के हवाले से यह जानकारी दी है। चैनल के अनुसार कसाब ने मां से कहा, ‘मैं जेहाद के लिए जा रहा हूं। मेरी किस्मत अब अल्लाह के हाथ में है।’

आईएसआई और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के डर से फरीदकोट वासी कसाब के बारे में कैमरे के सामने कुछ बताने को तैयार नहीं हैं। चैनल ने स्टिंग ऑपरेशन के जरिये गांव वालों और कुछ अन्य लोगों से यह बात उगलवाने में कामयाबी पाई है कि कसाब असल में पाकिस्तान का ही नागरिक है।





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