भोपाल.
भोपाल सहित प्रदेश के चार बड़े शहरों की सरकारी जमीन के प्रबंधन और विकास योजनाएं बनाने का जिम्मा हाईपावर मेट्रोपॉलिटन प्लानिंग कमेटी के हाथों में सौंपने की तैयारी शुरू हो गई है। नगर तथा ग्राम निवेश विभाग (टीएंडसीपी) ने इसके लिए प्रस्तावित कानून का मसौदा शासन को भेज दिया है। खास बात यह है कि इसमें ऐसे प्रावधान किए गए हैं कि कमेटी के अस्तित्व में आने के बाद उस क्षेत्र के विकास प्राधिकरणों का अस्तित्व स्वत: ही खत्म हो जाएगा।
टीएंडसीपी के सूत्रों के अनुसार 7४वें संविधान संशोधन में किए गए प्रावधानों के अनुसार प्रस्तावित कानून में १क् लाख या इससे अधिक आबादी वाले शहरों के लिए ‘मेट्रोपॉलिटन एरिया’ घोषित किया जाएगा, जहां उक्त कमेटी अस्तित्व में आएगी।
टीएंडसीपी ने कई राज्यों के जमीन के प्रबंधन से जुड़े कानूनों का अध्ययन कर ‘मध्यप्रदेश मेट्रोपॉलिटन प्लानिंग कमेटी एक्ट २क्क्८’ का प्रारूप तैयार किया है। इसे आवास एवं पर्यावरण विभाग को भेजा है, जहां वरिष्ठ सचिवों की समिति इसका परीक्षण कर कैबिनेट को भेजेगी। इसके बाद संबंधित विधेयक विधानसभा में लाया जाएगा। प्रदेश में फिलहाल भोपाल के अलावा इंदौर, ग्वालियर व जबलपुर को इस एक्ट के दायरे में रखना प्रस्तावित है।
ये काम करेगी कमेटी: मेट्रोपॉलिटन एरिया के लिए १क् साल का डेवलपमेंट प्लान बनेगा। इसमें क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग, उद्योग, व्यापार-व्यवसाय का विकास, यातायात व्यवस्था, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधाएं तथा आवास एवं पर्यावरण के लिए उठाए जाने वाले कदमों का उल्लेख होगा। संबंधित क्षेत्र का विकास भी इन्हीं के अनुरूप किया जाएगा।
कमेटी के निर्णय व प्लान का क्रियान्वयन संबंधित नगरीय निकाय व शासन की एजेंसियां करेंगी। कमेटी को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अधीन रखा जाएगा।
ये अधिकार रहेंगे
प्रस्तावित एक्ट के मसौदे के अनुसार कमेटी का क्षेत्राधिकार मेट्रोपॉलिटन एरिया रहेगा, जहां शासन के स्वामित्व की संपूर्ण जमीन का प्रबंधन और इससे जुड़े मामलों का निपटारा उक्त कमेटी करेगी। इन जमीनों का सारा रिकॉर्ड भी कमेटी के पास रहेगा। हालांकि प्रस्तावित एक्ट रेलवे, सेना और केंद्र सरकार द्वारा विशेष प्रायोजन के लिए अधिसूचित जमीन के उपयोग संबंधी निर्णय पर लागू नहीं होगा।
टीएंडसीपी का कोई रोल नहीं रहेगा
प्रस्ताव के अनुसार मेट्रोपॉलिटन एरिया में टीएंडसीपी एक्ट लागू नहीं रहेगा। चूंकि विकास प्राधिकरण टीएंडसीपी एक्ट के तहत ही काम करते हैं इसलिए उनका अस्तित्व अपने आप खत्म हो जाएगा। यहीं नहीं मेट्रोपॉलिटन एरिया में टीएंडसीपी संचालनालय का भी कोई रोल नहीं रहेगा।
ऐसा होगा कमेटी का स्वरूप
राजधानी के लिए मुख्यमंत्री तथा अन्य स्थानों के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के मंत्री कमेटी के चेअरमैन होंगे। उस क्षेत्र की सबसे बड़ी नगर निगम का महापौर वाइस चेअरमैन होगा। प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी को सचिव बनाया जाएगा। विधानसभा के चार तथा लोकसभा के दो सदस्य भी कमेटी के सदस्य रहेंगे।
इनका मनोनय क्रमश: विधानसभा व लोकसभा अध्यक्ष करेंगे। दो तिहाई सदस्य संबंधित एरिया में आने वाले नगरीय निकाय व पंचायतों से चुने जाएंगे। इनके अलावा पांच अशासकीय सदस्य होंगे जो आर्थिक, शहरी विकास, जमीन प्रबंधन और पर्यावरण के जानकार होंगे। इनका मनोनयन राज्य शासन करेगा।