भोपाल. प्रसिद्घ साहित्यकार, स्वतंत्रता सेनानी राजेंद्र अनुरागी नहीं रहे। शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात उनका निधन हो गया। शनिवार की दोपहर भदभदा विश्राम घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।
77 वर्षीय श्री अनुरागी का निधन सभी को शोकमग्न कर गया। अपनी तमाम खूबियों के चलते वे शहर की प्रतिष्ठित हस्तियों में गिने जाते थे। आचार्य रजनीश के बालसखाओं में शुमार रहे श्री अनुरागी ने ओशो की कई प्रसिद्घ पुस्तकों की समीक्षा भी लिखी।
उनके अनगिनत प्रशंसकों में से एक मकबूल वाजिद कहते हैं ‘जिंदगी का कोई भी पहलू उनसे अछूता नहीं रहा। खूब जिया और शान से जिया और परलोक भी सिधारे तो किसी को खबर तक नहीं हुई।’ अनुरागी जी का जीवन उपलब्धियों की खान रहा। माध्यमिक शिक्षा मंडल तथा भोपाल नगर निगम में जनसंपर्क अधिकारी के बतौर काम करते हुए उन्हें अपनी अलग पहचान बनाई।
वल्र्ड एकेडमी ऑफ क्रिएटिव साइंस एंड कांशियसनेस (पूना) के मैनेजिंग डायरेक्टर, मासिक पत्रिका विंध्याचल के संपादक और जनसंपर्क विभाग के उप संचालक जैसे अति व्यस्त कामों के बावजूद अनुरागी जी ने सृजन में अपनी सक्रियता को कभी कम नहीं होने दिया।
उन्होंने केंद्रीय फिल्म डिवीजन के लिए वृत्त चित्र बनाए तो अनगिनत मुशायरे और कवि सम्मेलन में भी अपन रचनाओं से समा बांध दिया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने श्री अनुरागी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि प्रदेश ने एक वरिष्ठ साहित्यसेवी खो दिया है।