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वीआईपी के सुरक्षाकर्मियों की भूमिका संदेह के घेरे में

भोपाल साहब आपका मोबाइल आया है..। आज आप क्या खाएंगे? बच्चों को कब लाना है साहब? यह संवाद मालिक और नौकर के बीच का नहीं, बल्कि यह सरकार से सुरक्षा प्राप्त नेताओं और अन्य असरदार व्यक्तियों को राज्य शासन द्वारा मुहैया कराए गए सुरक्षा कर्मचारियों के बीच अक्सर सुनाई देता है।

इन्हें तैनात तो किया जाता है सुरक्षा के लिए, लेकिन इनका अधिकांश समय साहब की चाकरी में ही गुजर जाता है। हाल ही में पूर्व मंत्री और विधायक सुनील नायक की हत्या और सांसद वीरेंद्र खटीक की पिटाई के बाद इन सुरक्षाकर्मियों की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है।

सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में करीब 980 पुलिस कर्मचारी गनमैन (पर्सनल सिक्यूरिटी ऑफिसर) की नौकरी कर रहे हैं। इनमें से कुछ एनएसजी प्रशिक्षित भी हैं। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, बाबूलाल गौर, उमा भारती और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी के सुरक्षा घेरे में करीब 100 जवान लगे हैं। इनके अलावा लगभग 12वीं विधानसभा के 160 विधायकों को भी सरकार ने सुरक्षा दे रखी है।

केंद्रीय मंत्रियों अजरुन सिंह, कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया और कांतिलाल भूरिया सहित सभी सांसदों, कुछ पूर्व सांसदों और अन्य असरदार लोगों को गनमैन मिले हैं।

गनमैन हो गए मोबाइल फोन अटेंडर : मंत्री के दौरे में गनमैन की भूमिका मोबाइल अटेंडर की होती जा रही है। गनमैन का मोबाइल फोन नंबर लगाकर मंत्री से आसानी से बात की जा सकती है। यह संवाद की दृष्टि से तो ठीक है, पर ऐसे में गनमैन मंत्री की सुरक्षा की तरफ से ध्यान हटाकर मोबाइल फोन पर बात करने में तल्लीन हो जाता है। यही लापरवाही कभी-कभी गंभीर परिणाम दे देती है।

सेवा के कुछ नजारे :

स्टेशन, एयरपोर्ट, सफर में या अन्य कई जगहों पर गनमैन द्वारा साहब की चाकरी के कई नजारे देखने को मिलते हैं। पुलिस सेवा में रह चुके एक नेता गनमैन को अटैची उठाने से रोक नहीं पाते। हाल ही में चुनाव प्रचार के दौरान हेलिकॉप्टर में एक नेताजी के चेहरे को गनमैन ने अपने रुमाल से साफ किया और कंघे से बाल भी संवारे। ऐसा ही एक वाक्या एक सांसद के साथ हुआ, जब वे गनमैन को घर छोड़ आए और उनकी पिटाई हो गई।

नतीजे गंभीर

टीकमगढ़ जिले में विधायक सुनील नायक की हत्या उनके गनमैन की मौजूदगी में हुई। हालांकि विधायक बृजेंद्र सिंह राठौर को भी गनमैन मिले हुए हैं। दोनों के सुरक्षाकर्मी यह कह रहे हैं कि उन्होंने गोलियां चलाईं, लेकिन कब चलाईं यह जांच का विषय है। हाल ही में बीना में भी आरपीएफ जवानों ने सांसद वीरेंद्र कुमार की पिटाई कर दी थी। उस समय उनका गनमैन नहीं था। इसके पहले पूर्व मंत्री किशोरीलाल वर्मा और तत्कालीन परिवहन मंत्री लिखीराम कांवरे की हत्या के समय भी सुरक्षाकर्मियों की कार्यप्रणाली पर उंगली उठी थी।

दोनों नहीं चाहते कोई दूर करे

बताया जाता है कि गनमैन ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों में से अधिकांश की उम्र 45 साल के ऊपर हो चुकी है और वे कई सालों से एक ही व्यक्ति के पास नौकरी कर रहे हैं। न तो वीआईपी उन्हें छोड़ना चाहता न ही गनमैन। पुलिस के आला अफसर भी गनमैन के दुरुपयोग की बात को स्वीकारते हैं, पर कार्रवाई में वे खुद को असहाय महसूस करते हैं।

स्टेटस सिंबल

जिन असरदार लोगों के पास यह सुविधा है वे बतौर स्टेटस सिंबल इसे अपने पास रखे हैं। ये लोग विशेषतौर पर कार्बाइन वाले गनमैन की मांग करते हैं।

गनमैन की ड्यूटी में लगे लोगों की कटौती की जा रही है। करीब 10 फीसदी गनमैन कम किए जाने हैं।

विनोद चौधरी अपर मुख्य सचिव, गृह





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