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जम्मू-कश्मीर में 60 फीसदी मतदान

जम्मू. जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के पांचवें चरण में शनिवार को चुनाव बहिष्कार की अपील व हिंसक झड़पों के बीच 60 फीसदी मतदान हुआ। पुलवामा में चुनाव विरोधी प्रदर्शनकारियों व सुरक्षा बलों के बीच भिड़ंत में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 14 जवानों समेत 35 लोग घायल हो गए।

11 विधानसभा सीटों के 1154 मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के लिए सुरक्षा बलों की दो सौ कंपनियां तैनात की गई थीं। कश्मीर संभाग के छह व जम्मू संभाग के पांच विस क्षेत्रों में हुए मतदान के साथ ही पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, पूर्व मंत्री गुलाम हसन खान, सैयद बशीर अहमद, कांग्रेस के सांसद लाल सिंह, नेशनल कांफ्रेंस के शब्बीर अहमद सरीखे नेताओं के अलावा कुल 179 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में बंद हो गया है।

कठुआ, शोपियां, वाग्छी, त्राल, पांपोर, पुलवामा, राजपोरा, बानी, हीरानगर, बिलावर तथा बसोहली विस क्षेत्रों में 1154 में 626 मतदान केंद्र संवेदनशील तथा 386 अति संवेदनशील घोषित किए गए थे। इनमें आतंकवाद प्रभावित शोपियां व त्राल विस क्षेत्रों में 21-21 तथा कठुआ में 20 जबकि पुलवामा और वाग्छी में 19-19 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।

सुरक्षा बलों से भिड़ंत, एक की मौत, 35 घायल : दक्षिण कश्मीर के पुलवामा में चुनाव विरोधी प्रदर्शनकारियों व सुरक्षा बलों के बीच हिंसक भिड़ंत में एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई, वहीं 15 जवानों समेत 35 लोग घायल हो गए।

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, पुलवामा के कोइल में आजादी समर्थक नारे लगा रहे प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए जब लाठीचार्ज से कोई असर नहीं पड़ा तो सुरक्षा बलों ने गोलियां चला दीं। इसमें तीन लोग घायल हो गए, वहीं लाठीचार्ज से कई फोटो पत्रकारों समेत करीब 20 लोग जख्मी हुए। इनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। इसके चलते तीन मतदान केंद्रों पर मतदान प्रक्रिया रोक दी गई है।

कश्मीर में जन-जीवन दूसरे दिन भी प्रभावित

राज्य के 11 विस क्षेत्रों में मतदान के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी व अलगाववादियों की चुनाव बहिष्कार की अपील को बेअसर करने के लिए सुरक्षा बलों की सख्ती के चलते शनिवार को लगातार दूसरे दिन भी श्रीनगर समेत आस-पास के क्षेत्रों में जन-जीवन ठप रहा। श्रीनगर तथा पुलवामा, शोपियां जाने वाली सभी सड़कों पर यातायात रोक दिया गया था। शहरों में भी ज्यादातर दुकानें बंद रहीं। वहां अघोषित कफ्यरू सी स्थिति नजर आई।

दर्जनभर अलगाववादी नेता नजरबंद

चुनाव के मद्देनजर हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के दोनों धड़ों के नेता मीरवाइज मौलवी उमर फारुख और सैयद अली शाह गिलानी सहित एक दर्जन से अधिक अलगाववादी नेताओं को अभी भी उनके घरों में नजरबंद रखा गया है। इन नेताओं को शोपियां-पुलवामा चलो मार्च में शामिल होने से रोकने के लिए नजरबंद रखा गया।

कश्मीर में चुनाव के खिलाफ अभियान चला रही अलगाववादियों की समन्वय समिति ने इस मार्च का आह्वान किया था। मीरवाइज करीब एक महीने से नजरबंद हैं। वहीं सैयद अली शाह गिलानी गुरुवार से अपने निवास में नजरबंद हैं।





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