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ऐसे गुजरा सचिवालय में पहला दिन

जयपुर. gah शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजभवन से सीधे सचिवालय पहुंचते हैं। यहां महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने के बाद वे अधिकारियों के साथ पैदल ही आगे बढ़ चलते हैं। गणोशजी को धोक, अपने पुराने कक्ष में और फिर इंतजार कर रही उस गद्दी की ओर..।

चेहरे पर मुस्कुराहट और अभिवादन स्वीकारते दोनों हाथ। गद्दी के नजदीक आकर गहलोत सादगीभरे अंदाज में वहां मौजूद लोगों से पूछते हैं, बैठूं क्या? गहलोत का सहज भाव देखकर हर चेहरे पर मुस्कुराहट तैर जाती है।..और अशोक गहलोत मुख्यमंत्री की गद्दी पर बैठ जाते हैं। ‘भास्कर’ ने हर पल को कैद करने की कोशिश की। मुख्य द्वार से दाखिल होकर अपनी कुर्सी तक ऐसे पहुंचे मुख्यमंत्री गहलोत..

मुख्यमंत्री ने रखा कदम
शनिवार, सवेरे 9:30 बजे - शपथ ग्रहण करने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सीधे राजभवन से सचिवालय पहुंचते हैं। ठीक साढ़े नौ बजे गहलोत का काफिला मुख्य भवन के पोर्च में आकर रुकता है। अधिकारियों-कर्मचारियों की भारी भीड़ के बीच से गहलोत सीधे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा की ओर बढ़ चलते हैं। यहां गांधी को पुष्प अर्पित कर शीश झुकाते हैं।

कर्मचारियों ने बिछाए पलक-पांवड़े
9:35 बजे - पुष्प अर्पित करने के बाद गहलोत लौटते हैं। मालाएं लेकर खड़े कर्मचारी नेता और कर्मचारी एक के बाद एक मालाएं उनके गले में डालने लगते हैं। कोई पैर छू रहा है तो कोई हाथ जोड़कर उनका स्वागत कर रहा है। रवींद्र पारीक, मेघराज पंवार सहित कई कर्मचारी नेताओं ने उनका अभिनंदन किया। यहां मुख्य सचिव डी.सी. सामंत, सी.एस. राजन, पुलिस महानिदेशक के.एस. बैंस, परविंदर पंवार, पी.रमेश सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने भी गहलोत का स्वागत किया।

गणेशजी को लगाई धोक
9:40 बजे - प्रमुख शासन सचिव सी.एस. राजन, अपने अन्य साथियों, पुलिस महानिदेशक के साथ गहलोत को मुख्य भवन के प्रवेश द्वार पर गणोशजी की प्रतिमा के पास ले जाते हैं। यहां गहलोत भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं। पंडित राधेश्याम शर्मा ‘मोरध्वज’ मंत्रोच्चरण कर गहलोत के सफल कार्यकाल की कामना करते हैं। गहलोत को प्रसाद खिलाया जाता है।

पुराना कक्ष, पुरानी यादों में गहलोत 9:45 बजे - गहलोत लिफ्ट के सहारे ऊपर जाते हैं। वे कुछ ही देर में मुख्य भवन के अपने उस कक्ष में पहुंचते हैं जहां उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अपना पिछला कार्यकाल पूरा किया था। यहां कुछ देर तक अधिकारियों से बतियाते हुए गहलोत अपनी पुरानी यादों को भी ताजा करते हैं। पंडितजी यहां भी मंत्रोच्चरण करते हैं।

..बढ़ चले कुर्सी की ओर
9:55 बजे - मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में खड़े अधिकारी-कर्मचारियों का अभिवादन स्वीकारते हैं। हल्की मुस्कुराहट बिखेरते हुए एक नजर परिसर में दौड़ाते हैं। यहां राजन उन्हें परिसर में हुए बदलाव के बारे में बताते हैं। सुनील अरोड़ा, डी.सी. सामंत, एस.एन. थानवी, परविंदर पंवार सहित बड़ी संख्या में अधिकारी गहलोत का स्वागत करते हैं।..बातचीत करते हुए गहलोत कार्यालय में दाखिल हो जाते हैं..अधिकारी उन्हें ऊपर मुख्यमंत्री कक्ष की ओर ले जाते हैं।

..और संभाली गद्दी
10:05 बजे - कक्ष में मौजूद हर व्यक्ति इसी पल का इंतजार कर रहा था। गहलोत मुस्कुरा रहे हैं और अभिवादन स्वीकारते दोनों हाथ। गद्दी उनका इंतजार कर रही है..बैठने से पहले सादगीभरे अंदाज में गहलोत जैसे इजाजत मांगते हुए पूछते हैं, बैठूं क्या? उनके सहज अंदाज को देख हर किसी के चेहरे पर मुस्कुराहट तैर जाती है..और अशोक गहलोत मुख्यमंत्री की गद्दी पर बैठ जाते हैं। अधिकारी-कर्मचारी उन्हें मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं देते हैं। लगातार चमकते फ्लैश के बीच गहलोत अब मीडियाकर्मियों से मुखातिब होते हैं। इसी बीच एक कर्मचारी नेता उनकी टेबल पर ज्ञापन भी सरका देता है।

कई कक्षों का लिया जायजा
10:20 बजे - बाद में गहलोत मुख्यमंत्री कार्यालय में विभिन्न कक्षों का जायजा लेते हैं। वे मुख्यमंत्री सहायता कोष के संबंध में जानकारी लेने के लिए भी पहुंचे। अधिकारियों की बैठक भी ली।

रवाना हुए मुख्यमंत्री
11:27 बजे - गहलोत 11 बजकर 27 मिनट पर कार्यालय से निकलते हैं। बाद में वे शाम को दुबारा बैठक के लिए आते हैं।





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