जयपुर.
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि पिछली सरकार के समय खजाना खाली का मतलब तो केवल एक जुमला था। खजाना न तो कभी खाली रहता है और न ही कभी खजाना खाली था। उस समय राज्य में वित्तीय संकट जरूर था।
मुख्यमंत्री ने भाजपा के खजाना खाली होने का राग अलापने संबंधी आरोप के बारे में कहा कि उस समय केन्द्र में एनडीए की सरकार थी। उस सरकार के पास देश के लिए कोई आर्थिक नीतियां नहीं थीं। इसीलिए खुद केन्द्र सरकार और तमाम राज्य सरकारों को वित्तीय संकट से गुजरना पड़ रहा था। कई राज्यों को वेतन चुकाने के लिए बिल्डिंगें बेचनी पड़ रही थीं। ऐसे कठिन समय में भी तत्कालीन सरकार ने बेहतर वित्तीय प्रबंधन करके न केवल कर्मचारियों को समय पर वेतन दिया, बल्कि अकाल राहत का भी अच्छा प्रबंधन किया।
अब यूपीए सरकार में प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह की आर्थिक नीतियों का ही परिणाम है कि देशभर में नया बूम आया है। केन्द्र के साथ- साथ राज्यों के पास भी आर्थिक संसाधन बढ़े हैं। केन्द्र ने किसानों के 77 हजार करोड़ रुपए के कर्जे माफ किए हैं। सर्व शिक्षा अभियान सहित कई केन्द्रीय योजनाएं लागू की हैं और उनमें पैसा दिया है।
वित्तीय प्रबंधन की पोल खुली : गहलोत ने कहा कि भाजपा सरकार के वित्तीय प्रबंधन की तो पोल खुल गई है। पिछली बार जब कांग्रेस सत्ता में आई तब राज्य पर 23 हजार करोड़ रुपए का कर्जा था। जब भाजपा ने शासन संभाला तो उस समय कर्जा 43 हजार करोड़ रुपए था। इसमें यदि 1-2 हजार करोड़ का कर्जा भी कम होता तो भी मानते वित्तीय प्रबंधन अच्छा था। अब राजस्थान पर कर्जभार बढ़कर मार्च, 09 तक 82 हजार करोड़ रुपए हो जाएगा।
कर्मचारी महत्वपूर्ण : गहलोत ने कहा कि कर्मचारियों ने पहले भी अच्छा काम किया था। पिछली सरकार के समय भी अकाल प्रबंधन जैसा बड़ा कार्य कर्मचारियों की वजह से ही सफल हो पाया। प्रशासन गांवों के संग औ्रर प्रशासन शहरों की ओर जैसे कार्यक्रमों में भी कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को जल्दी ही दूर करने का प्रयास किया जाएगा।