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बिना गार्ड वाली बैंक ने 76 लाख क्यों रखे?

इंदौर. बैंक ऑफ महाराष्ट्र में हुई सनसनीखेज डकैती ने शहर का नाम तो बदनाम किया ही साथ में रहवासियों के मन में खौफ भी पैदा कर दिया। सभी की नजरें पुलिस की कार्यप्रणाली पर गढ़ी हैं, वहीं शहर के दर्जनों लोगों ने भास्कर को कॉल कर यह सवाल भी खड़ा किया कि क्या कारण रहा कि बैंक में 76 लाख रुपए गार्ड नहीं होने के बावजूद तिजोरी में रखे? भास्कर ने पड़ताल की तो सबसे बड़ी लापरवाही बैंक की ही उजागर हुई। बैंक मैनेजर कई सवालों के जवाब मामला जांच में होने का बताकर टाल गए।

यह रिटेंशन लिमिट का हनन है
भास्कर ने जनता के सवालों को लेकर बैंक के पूर्व अधिकारियों से बात की तो उन्होंने नाम न छापे जाने की शर्त पर जो जानकारियां दीं वो चौंकाने वाली हैं। एक अधिकारी ने बताया शहर की सभी बैंकों का रुपया उनकी चेस्ट शाखा, ट्रेजरी शाखा या हेड ऑफिस में जमा रहता है। नियमों के अनुसार हर बैंक की रिटेंशन लिमिट तय रहती है। इसके तहत कोई भी बैंक एक सीमित राशी ही बैंक में रख सकती है। अगर कोई बैंक रिटेंशन लिमिट से ज्यादा रुपया रखती है तो उसे इसका स्पष्टिकरण कंट्रोलिंग ऑफिसर या हेड ऑफिस को देना रहता है। रिटेंशन लिमिट 50 हजार रुपए से लेकर बैंक के टर्नओवर के मुताबिक रहती है। जानकारों के मुताबिक अपवादों को छोड़ दें तो किसी भी बैंक की रिटेंशन लिमिट 10 लाख से ज्यादा नहीं हो सकती।

जरूरत पड़ने पर राशि बुलाई जाती है
बैंक अपनी-अपनी रिटेंशन लिमिट के मुताबिक रुपया रखती हैं। इसके बाद दिनभर के आदान-प्रदान के बाद रुपया आ ही जाता है। अगर कोई कस्टमर बड़ी राशी की डिमांड करता है तो कुछ समय में बैंक ट्रेजरी शाखा या चेस्ट शाखा से रुपया मंगवा सकती है। अगर बैंक के पास दिनभर में ज्यादा कैश आ भी जाए तो वे शाम तक उसे अपने प्रिंसिपल अकाउंट या क्लियरिंग हाउस में जमा करा कर रिटेंशन लिमिट तक का रुपया रख लेती है। जिन बैंकों की चेस्ट शाखा नहीं होती वे आरबीआई के क्लियरिंग एडजस्टमेंट अकाउंट से ट्रांजेक्शन करती हैं।

शुक्रवार को रुपए रखने का सवाल ही नहीं उठता?
सभी बैंकों को शुक्रवार तक हफ्तेभर के ट्रांजेक्शन का स्टेटमेंट हेड ऑफिस को देना रहता है। इसके बाद हेड ऑफिस सभी ब्रांचों के स्टेटमेंट रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) को भेज देता है। इसके चलते शुक्रवार को तो कोई भी बैंक रिटेंशन लिमिट का हनन नहीं करती। अगर शुक्रवार को कोई खातेदार या बड़ा चेक क्लियरिंग के लिए आ जाए तो राशि हाथो-हाथ मंगाकर दी जा सकती है।

‘सैद्धांतिक हैं ये सब बातें’

>> आपकी रिटेंशन लिमिट कितनी है?
मैनेजर : हमें बोलने की परमिशन नहीं है।
>> हमारी जानकारी के हिसाब से किसी भी बैंक की लिमिट 5-10 लाख से ज्यादा नहीं होती?
मैनेजर : बस वैसे ही आप लिखें।
>> अगर इतनी कम रिटेंशन लिमिट रहती है तो आपने इतना कैश कैसे रखा?
मैनेजर : बहुत सारी व्यावहारिक समस्याएं रहती हैं, जो आप कह रहें हैं ये सब सैद्धांतिक बातें हैं।
>> क्या आपने इतना कैश रखने की जानकारी हेड ऑफिस या कंट्रोलिंग ऑफिसर को दी थी?
मैनेजर : आप दो दिन रुक जाएं, मैं जांच से मुक्त हो जाऊं फिर बता पाऊंगा।
>> छोटी ब्रांच होने के बावजूद बड़ी राशि कैसे रखी, जब आपके पास गार्ड की सुविधा भी नहीं थी?
मैनेजर : हमारी कोई चेस्ट शाखा या ट्रेजरी शाखा नहीं है इसलिए रखना पड़ी।
>> क्या आपने गुरुवार शाम को राशि रखी थी या आमतौर पर इतना कैश रखते हैं?
मैनेजर : यह जानकारी मैं अभी नहीं दे सकता।
>> अगर आपके बैंक की चेस्ट शाखा नहीं है तो ट्रांजेक्शन कहां से डील करते हैं?
मैनेजर : हेड ऑफिस से।
>> क्या हेड ऑफिस को पता था कि इतना कैश आपने रखा है, क्या इसकी अनुमति थी?
मैनेजर : इसका जवाब में जांच पूरी होने के बाद ही दे पाऊंगा।
>> क्या आपको किसी कर्मचारी पर डकैतों से मिलीभगत का शक है।
मैनेजर : नहीं।
(वैभव काले ब्रांच मैनेजर, बैंक ऑफ महाराष्ट्र)





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