इंदौर.
देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में कुर्की की नौबत के बाद अब आंतरिक कलह पनपने लगी है। नालंदा परिसर की तल मंजिल, फस्र्ट फ्लोर वालों पर बदनामी का ठीकरा फोड़ना चाहती है तो ऊपर वाले निचले कार्यालय को दोषी ठहराने की तैयारी में है।
दोनों के बीच यूनिवर्सिटी का इंजीनियरिंग विभाग भी लपेटे में आ सकता है। भुगतान के मामले में भी यूनिवर्सिटी का दोहरा चरित्र सामने आया है। शनिवार को कुलपति डॉ. भागीरथ प्रसाद ने खुलासा किया कि कुर्की नोटिस की खबर उन्हें किसी ने नहीं दी। 4 दिसंबर को वे भोपाल में थे। वहां से कुछ दिन बाद लौटे थे। तब तक नोटिस के बारे में किसी ने नहीं बताया।
इधर, रजिस्ट्रार आरडी मूसलगांवकर ने कहा यूनिवर्सिटी के हर बड़े मामले की खबर सभी को रहती है। कोई भी काम छिपाकर नहीं किया जाता। इस मामले की तो अब जांच होना चाहिए। सूत्रों के मुताबिक इस मामले में अगर कार्रवाई होती है तो यांत्रिकी विभाग प्रभारी पर भी गाज गिर सकती है। कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता अभय दुबे ने पत्रकारवार्ता लेकर यूनिवर्सिटी में हुए घटनाक्रम को साजिश बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार को भुगतान यूनिवर्सिटी के अधिकारियों की मिलीभगत से किया गया है। उन्होंने कुलपति से मांग की है राज्यपाल से रजिस्ट्रार की शिकायत की जाए।
ये कैसी भुगतान नीति
यूनिवर्सिटी की भवन समिति ने आईआईपीएस के मामले में अतिरिक्त भुगतान को लेकर कोर्ट में जाने का फैसला लिया, जबकि इंस्टिट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज (आईईटी), मीडिया भवन और कम्प्यूटर साइंस की नई बिल्डिंग में फोरन बढ़ी हुई दरों के आधार पर भुगतान कर दिया।
मीडिया भवन का ठेका एक करोड़ 48 लाख में हुआ था। इसके सीमेंट और सरिया के भाव में कुछ वृद्धि हुई थी। ठेकेदार ने मात्र एक पत्र यूनिवर्सिटी को लिखा और भवन समिति ने उसे अतिरिक्त पैसा देने की मंजूरी दे दी। आईईटी और कम्प्यूटर साइंस भवन के मामले में भी यही हुआ। सवाल यह है जब दरें बढ़ी तो अतिरिक्त पैसा मंजूर कर दिया। लेकिन जब सीमेंट, सरिया सस्ता हुआ तो दरें कम क्यों नहीं की गई।