इंदौर.
कनाड़िया रोड पर हुई इंदौर की सबसे बड़ी बैंक डकैती के मामले में देर रात तक पुलिस बैंक में ही डटी रही। सीसीटीवी की रिकॉर्डिग के आधार पर लुटेरों से पहले बैंक से निकले एक युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। उधर, रात से इंदौर में मौजूद डीजीपी शनिवार सुबह बैंक पहुंचे और मौका मुआयना करने के बाद वारदात को बड़ी चुनौती बताते हुए कुछ मिनटों में ही रवाना हो गए।
शिवशक्तिनगर स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा में शुक्रवार सुबह करीब दस मिनट के अंतराल में हुई सनसनीखेज 58.60 लाख रुपए की डकैती के बाद पहुंचे पुलिस अफसर रात 11.30 बजे तक डटे रहे। इस दौरान बैंक के रीजनल ऑफिस के अधिकारियों से लेकर सभी कर्मचारियों से बार-बार पूछताछ की गई। पुलिस ने शहर में होटलों और लॉजों सहित कई स्थानों पर चेकिंग अभियान चलाने के साथ पुराने बदमाशों को भी हिरासत में लिया।
बैंक के सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिग में पुलिस को एक युवक का पता चला, जो डकैतों के आने के ठीक पहले बैंक से निकला था। सुबह तक उसे हिरासत में ले लिया गया। पहले उसे पलासिया थाने फिर किसी अन्य स्थान पर रखकर एडीशनल एसपी और सीएसपी सहित अन्य अफसरों ने पूछताछ की। प्राथमिक रूप से इतना ही बताया जा रहा है कि वह युवक कहीं नौकरी करता है।
कर्मचारियों की कॉल डिटेल निकाली
पुलिस ने ताबड़तोड़ ही बैंक के सभी कर्मचारियों की कॉल डिटेल निकाल ली। सूत्रों के मुताबिक बैंक के नंबरों के साथ कर्मचारियों ने जिस-जिस से बात की सभी की खोज की जा रही है। प्राथमिक जांच में किसी बैंककर्मी की लुटेरों से मिलीभगत का सुराग नहीं मिला है। पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिग की सीडी भी बैंक से हासिल कर ली, जिसके शुरुआत में नहीं चलने पर थोड़ी कठिनाई आई। शाम तक कई संदिग्धों को भी हिरासत में लिया गया, जिनसे पूछताछ की जा रही है।
डीजीपी को आना पड़ा बैंक
शाम को एक निजी कार्यक्रम में शरीक होने इंदौर पहुंचे डीजीपी एसके राउत सुबह करीब 9.15 बजे आईजी अनिल कुमार, डीआईजी डी श्रीनिवासराव व सीएसपी गीतेश गर्ग के साथ बैंक पहुंचे। पांच मिनट से भी कम समय में वे बैंक का निरीक्षण कर लौट आए। उन्हें अधिकारियों ने घटनाक्रम की पूरी जानकारी दे दी थी। उन्होंने बैंक मैनेजर से थोड़े सवाल करने के बाद घटनास्थल का एक नजर में अध्ययन कर लिया। बाहर आते ही वे बोले कि यह वारदात पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है, जिसे जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। उधर, शहर में इस बात की भी चर्चा रही कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के इंदौर आने की सूचना मिलने के बाद ताबड़तोड़ डीजीपी को बैंक जाना पड़ा।
‘बैंक चालू है क्या?’
बैंक रोज की तरह 8.30 बजे खुली लेकिन इस बार फर्क यह था कि बंदूकधारी गार्ड इंद्रपाल भदौरिया बाहर तैनात था। इसे शुक्रवार को हुई डकैती के बाद दोपहर 1.45 बजे ही नियुक्त किया गया। शुक्रवार की तुलना में शनिवार को बैंक में ज्यादा खातेदार पहुंचे। सभी ने पहले तो एक ही सवाल किया कि क्या बैंक चालू है? मैनेजर वैभव काले ने कहा बैंक चालू भी है और आपका रुपया सुरक्षित भी है। खातेदार मीरा खंडेलवाल ने बताया शुक्रवार को वे भोपाल में थीं। डकैती का सुनते ही लॉकर की जानकारी लेने चली आईं।
प्रीतेश जैन पत्नी व बच्चों को लेकर अकाउंट की जानकारी लेने पहुंचे तो मिलिंद डावर भी रकम की सुरक्षा के बारे में जानने आए। बैंक के अफसर सभी को यही बताते जा रहे थे कि उनका पूरा पैसा सुरक्षित है और लॉकरों को भी कोई नुकसान नहीं हुआ। बैंक के रीजनल मैनेजर विनोद गुप्ता ने शनिवार को फिर से खातेदारों के लिए सूचना जारी करते हुए कहा ग्राहकों के सभी हित सुरक्षित हैं। बैंक का काम सुचारू रूप से चल रहा है।
बैंक के डीजीएम पहुंचे इंदौर
बैंक ऑफ महाराष्ट्र के डीजीएम एमवी धोवले नागपुर से इंदौर फ्लाइट से शनिवार सुबह 11.30 बजे पहुंचे। बैंककर्मियों ने बताया उन्होंने पहले रीजनल ऑफिस में अन्य ब्रांचों के मैनेजरों के साथ बातचीत की फिर एसपी संजीव शमी से मिले।
अपनी बात भी दमदारी से रखें
डीजीपी एसके राउत ने पुलिस अफसरों से कहा स्टाफ और संसाधन को लेकर उन्हें उपयुक्त फोरम पर अपनी बात दमदारी से रखना चाहिए। मुख्यमंत्री के इंदौर से रवाना होने के बाद डीजीपी पुलिस मैस में चुनिंदा अफसरों से रूबरू हुए और बोले जो भी समस्या है वह बताने से हिचकना नहीं चाहिए। डीजीपी ने मातहतों की हौसलाअफजाई करते हुए कहा जिस तरह हमने पहले वारदातें पकड़ी हैं, उसी तरह इस वारदात का खुलासा भी करेंगे।