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छग कांग्रेस में घमासान

रायपुर कांग्रेस विधायक दल की बैठक से पहले जोगी समर्थकों ने जमकर हंगामा मचाया। जेलरोड स्थित होटल सेलिब्रेेशन में हुई बैठक में हिस्सा लेने के लिए कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी वी नारायण सामी और पर्यवेक्षक जनार्दन द्विवेदी तथा बीके हरिप्रसाद के पहुंचते ही नारेबाजी शुरू हो गई।

बैठक शुरू होने तक हंगामा बढ़ता चला गया। विधायक दल की बैठक में नेता प्रतिपक्ष के लिए कोई नाम तय नहीं किया गया। इसका फैसला कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर छोड़ दिया गया है। बैठक शुरू होने से पहले कांग्रेस में दिनभर सियासी चालें चली गईं।

पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने अपने बंगले में विधायकों को भोज पर बुलाकर उनसे अपने पक्ष में हस्ताक्षर अभियान चलवा दिया। हालांकि कुछ नेताओं ने बाद में दावा किया कि हस्ताक्षर अभियान शुक्रवार को दोपहर से चल रहा था। आज उनसे दस्तखत कराए गए, जो छूट गए थे।

28 विधायकों के हस्ताक्षर वाला यह ज्ञापन प्रदेश प्रभारी और पर्यवेक्षकों को सौंप दिया गया। विधायक दल की बैठक शुरू होने से पहले ही कांग्रेस में खेमेबाजी नजर आने लगी थी। कुछ विधायक बैठक से पहले अपने-अपने साधनों से होटल पहुंचने लगे।

ठीक वक्त पर श्री जोगी एक बस में लगभग दो दर्जन विधायकों को लेकर होटल पहुंचे। हालांकि जोगी समर्थक पहले ही पहुंच गए थे और नारेबाजी शुरू कर दी थी। जोगी और विधायकों के पहुंचते ही हंगामा और बढ़ गया। यह बैठक खत्म होने के बाद तक चला।

बैठक में भी अशांति :

बंद कमरे में हुई विधायक दल की बैठक में भी शांति नहीं रह पाई। पता चला है कि जोगी समर्थक कई विधायक अंत तक दबाव बनाए हुए थे कि फैसला आज ही होना चाहिए। श्री द्विवेदी ने उन्हें समझाने का प्रयास किया कि कांग्रेस में यह परंपरा रही है कि फैसला पार्टी अध्यक्ष के लिए छोड़ दिया जाता है। लेकिन कई विधायक इस बात को मानने को तैयार नहीं थे।

बात यहां तक आ गई कि कुछ विधायकों ने इस्तीफे की पेशकश कर दी। इस पर श्री द्विवेदी ने भी साफ कह दिया कि आप लोग अपना निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं। उसके बाद जोगी कैंप के रणनीतिकारों की भीतर ही गुफ्तगू हुई। इसके बाद श्री जोगी ने प्रस्ताव रखा कि नेता प्रतिपक्ष के चयन का अधिकार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर छोड़ा जाए। सभी विधायकों ने इसका समर्थन कर दिया।

विधायकों से राय ली :दोनों पर्यवेक्षकों ने विधायकों से अलग-अलग मुलाकात कर उनसे उनकी राय भी पूछी। श्री द्विवेदी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि विधायकों से पर्यवेक्षकों ने नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे पर बात नहीं की। हालांकि विधायकों से अलग-अलग बातचीत का भी कुछ विधायकों ने कड़ा विरोध किया। उनका कहना था कि जो भी बात करनी है, सार्वजनिक तौर पर की जाए।





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