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कमांडो वगार ते सुरक्षा तलवार ते

नई दिल्ली/चंडीगढ़/ लखनऊ. अगर एनएसजी कमांडोज को मौके पर लाने में देर न की जाती तो मुंबई में आतंकी हमलों के बाद हताहतों की संख्या काफी कम होती। गौरतलब है कि गृह मंत्रालय ने तीन साल पहले ही सभी अर्धसैनिक बलों को साझेदारी के आधार पर और एनएसजी को पूर्णकालिक तौर पर विमान उपलब्ध कराने का इरादा जताया था। केंद्र सरकार ने एक बार फिर एनएसजी को फौरी तौर पर विमान मुहैया कराने की बात कही है।

नावें नहीं :

मुंबई में आतंकी समुद्र तट से घुसे थे। इसे देखते हुए तटीय सुरक्षा को केंद्र सरकार सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। हालांकि इससे संबंधित योजना 2005 में ही शुरू कर दी गई थी। यह बात और है कि योजना के तहत खरीदी जाने वाली 204 नावें अभी तक मिल नहीं सकी हैं। नियम नहीं बने : तटवर्ती इलाकों में मंजूर किए गए 73 थानों मंे से सिर्फ 55 ही शुरू हो सके हैं। इन थानों के लिए पुलिस कर्मियों की तैनाती का नियम भी नहीं बन सका है।

कमांडो वगार ते..

देश में हो रहीं आतंकी घटनाओं में अमोनियम नाइट्रेट के बढ़ते इस्तेमाल को रोकने की नीति तय करने के लिए करीब एक साल पहले गृह सचिव की अध्यक्षता में कैबिनेट सचिव ने एक समिति गठित की थी। इसकी रिपोर्ट भी अब तक पेश नहीं हुई है।

आर्थिक संसाधनों का रोना :

देश के प्रमुख महानगरों के लिए बनाई गई मेगा सिटी पुलिसिंग को लेकर एक शिकायत यह सामने आई है कि सरकार इसके लिए पर्याप्त धन मुहैया नहीं करा रही है। इसी तरह की शिकायत रेगिस्तान निगरानी योजना को लेकर भी है। स्वयं मंत्रालय के दस्तावेज भी इन शिकायतों की सच्चई बयां करते हैं।

ये काम भी नहीं हुए पूरे :

आईबी में छह हजार नए लोगों की भर्ती नहीं हो सकी है। दिल्ली पुलिस मंे 7612 अतिरिक्त पदों में से आधी की ही भर्ती हो पाई है। दिल्ली के 58 व्यस्ततम बाजारों और सीमावर्ती 27 चेक पोस्ट पर सीसीटीवी लगाने का कार्य भी प्रारंभिक चरण में ही है। सीआरपीएफ में नक्सलियों से लड़ने के लिए विशेष बटालियन खड़ी करने और बल के अंदर खुफिया तंत्र की स्थापना का कार्य भी लंबित है।

30 साल, 8 रिपोर्ट्े, नतीजा सिफर

देश में पुलिस बलों के आधुनिकीकरण को लेकर 1979 से अब तक आठ अलग-अलग रिपोर्ट्े पेश की जा चुकी हैं। इनमें से एक भी रिपोर्ट पर अब तक कार्रवाई नहीं की गई है। देश में पुलिस बलों की मौजूदा ढांचागत व्यवस्था 1902 में ब्रिटिश सरकार द्वारा गठित आयोग की सिफारिशों पर केंद्रित है।

एके 47 के मुकाबले लाठी मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त एमएन सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए लगभग 2000 करोड़ रुपए की राशि राज्यों को मुहैया करा चुकी है। इसके बावजूद आम पुलिसकर्मी सड़क पर लाठी पकड़े ही नजर आता है, जबकि आतंकी एके-47 रायफलों से हमला करते हैं।

यूपी में कमांडो का हाल

पुलिसकर्मियों की जबर्दस्त कमी से जूझ रहे उत्तर प्रदेश में 200 कमांडोज से ट्रैफिक डच्यूटी कराने के पीछे अधिकारिक वजह यह बताई गई कि वे बैठे-बैठे ‘बेकार’ हो रहे थे। हाल में एक कोबरा कमांडो को मुख्यमंत्री की करीबी नेता की सुरक्षा में लगाए जाने का मामला भी सामने आया है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री मायावती ने एटीएस में 2000 कमांडोज की भर्ती का ऐलान किया है।

सरकार को वीआईपी सुरक्षा के सख्त मापदंड बनाने चाहिए। बिना असली खतरे के वीआईपी सुरक्षा हर्गिज नहीं देनी चाहिए।

एके मित्रा, एनएसजी और बीएसएफ के पूर्व महानिदेशक

ऐसे होती है माया की सुरक्षा

एसपीजी सुरक्षा कवर देने से केंद्र के इनकार के बाद मायावती ने अपनी हिफाजत के लिए खुद ही फौज-फाटा खड़ा कर लिया है। पेश है इसकी बानगी:

>> 350 पुलिसकर्मियों की रोजाना शिफ्टवाइज डच्यूटी

>> वे जहां जाती हैं, कफ्यरू जैसे हालात बना दिए जाते हैं

>> दुकानें बंद करा दी जाती हैं और ट्रैफिक रोक दिया जाता है

>> राहगीरों का मुंह दूसरी तरफ करा दिया जाता है।

>> मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रवेश, निकास और चेकिंग के लिए जरूरत से ज्यादा द्वार

>> मायावती के चैंबर के लिए बिलकुल अलग एलीवेटर





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