नई दिल्ली.
देश में यात्री कार उद्योग में क्रांति का संचार करने वाली और लोगों की जीवन शैली बदल देने वाली मारुति देखते देखते पच्चीस वर्ष की हो गई है। चौदह दिसम्बर 1983 को मारुति ने लोकप्रिय छोटी कार 786 सीसी की मारुति 800 को बाजार में पेश किया था। उसके बाद कंपनी ने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। पच्चीस वर्ष का लंबा सफर तय करने के बाद भी मारुति ब्रांड की लोकप्रियता में आज भी कोई कमी नजर नहीं आ रही है।
चौबीस फरवरी 1981 को भारतीय कंपनी कानून 1956 के तहत देश में छोटी कार बनाने के लिए जापान की सुजुकी मोटर कापरेरेशन (एसएमसी) के साथ मारुति उद्योग लिमिटेड की स्थापना एक संयुक्त उद्यम के रूप में हुई थी। इसके बाद कंपनी की सफलता का जो सिलसिला चला वह पिछले पच्चीस वर्ष से अनवरत रूप से जारी है। देश में यात्री कार वर्ग में विश्वभर की बड़ी से बड़ी कंपनियों के प्रवेश से भी मारुति को कोई विशेष असर नहीं पड़ा।
देश के यात्री कार बाजार के आधे से अधिक हिस्से पर आज भी काबिज मारुति के बेड़े में कार चाहने वालों की पसंद के लिए माडलों की कोई कमी नहीं है। मारुति 800 को उतारने के मात्र एक वर्ष के भीतर ही मारुति ने उपयोगी वाहन के रूप में ओमनी को बाजार में उतारा और इसने भी उपभोक्ताओं के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। इसके एक साल बाद 970 सीसी वर्ग में मारुति ने युवाओं की पसंद जिप्सी पेश की और मात्र तीन वर्ष के भीतर ही सितम्बर 1986 में एक लाख वाहनों के उत्पादन का रिकार्ड स्थापित कर लिया।
इतना ही नहीं मात्र चार वर्ष के दौरान ही मारुति ने विदेशों की तरफ रुख कर लिया और सितम्बर 1987 में 500 कारों की पहली खेप हंगरी को रवाना की गई। मारुति ने न केवल देश के यात्री कार वर्ग में क्रांति का संचार किया बल्कि आटो उपकरण के क्षेत्र के विकासे में भी महत्वपूर्ण योगदान किया। वर्ष १९९१ में मारुति की कारों में 65 प्रतिशत स्वदेशी पुर्जो का इस्तेमाल होने लगा था।
वर्ष 1992 में मारुति में संयुक्त उद्यम हिस्सेदार एसएमसी ने अपना हिस्सा बढ़ाकर आधा कर लिया। कंपनी ने लोगों की पसन्द के अनुरूप माडलों को बाजार में उतारने के लिए निरंतर अनुसंधान पर जोर दिया और इसके परिणामस्वरुप 1993 में 993 सीसी वर्ग में जेन माडल उतारा गया। इसके एक वर्ष बाद ही 1.3 लीटर वाली 1298 सीसी की तीन बाक्स कार एस्टीम एलएक्स बाजार में आई। इस दौरान कंपनी मांग के अनुरुप उत्पादन क्षमता में वृद्धि करती रही और मार्च 1995 में स्थापित क्षमता दो लाख करने के साथ ही अप्रैल 1996 में 15 लाखवीं कार बनाने का रिकार्ड बनाया।
उपभोक्ताओं को बिक्री बाद बेहतर सेवाएं देने के लिए भी कंपनी ने विशेष प्रयास किए और मई 1996 में 24 घंटे की आन रोड वाहन सेवा शुरू की। दिसम्बर 1999 में कंपनी के तीसरे संयंत्र के उद्घाटन के साथ ही स्थापित क्षमता साढ़े तीन लाख वाहन हो गई और प्रीमियम वर्ग में बालैनो तथा ए-२ सेगमेंट में वेंगन आर बाजार में आई। कंपनी ने सुरक्षित ड्राईविग के लिए दिल्ली सरकार के साथ मिलकर मार्च 2000 में ड्राईविग प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान की शुरुआत की। इसी वर्ष जून में मारुति ने इस संबंध में इग्नू से समझौता किया। अगस्त 2000 में लक्जरी एस्टेट कार माडल एल्टूरा पेश करने के बाद मारुति ने सितम्बर में अल्टो लांच की जिसने कंपनी की छवि को और निखारने में खूब योगदान दिया।
वर्ष २क्क्१ में मार्च माह में आल्टो वीएक्सआई लांच की गई। उसी वर्ष अक्टूबर में कंपनी ने बहुउपयोगी कार वरसा बाजार में उतारी। सरकार की तरफ से जब भी करों में रियायत मिली मारुति ने इसका लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने में कोई देर नहीं की। वर्ष 2003 में आल्टो का एसी माडल, मारुति 800 के ई 2 स्टैंडर्ड लांच करने के साथ ही मारुति डीलक्स संस्करण को समाप्त कर दिया गया। इसी वर्ष ग्रैंड विटारा एक्सएल 7 बाजार में आई और कुल उत्पादन 40 लाख को पार कर गया। जून 03 में मारुति जनता को अपने साथ जोड़ने के लिए प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाई और इसे आकार के मुकाबले 11.2 गुना अधिक अभिदान मिला। नौ जुलाई 2003 को मारुति बम्बई शेयर बाजार (बीएसई) और नेशनल स्टाक एक्सचेंज (एनएसई) में सूचीबद्ध हो गई। इसी वर्ष सितम्बर ने आल्टो के दामों में 23 हजार रुपए की कमी की और दिसम्बर में न्यू ग्रैंड विटाराको बाजार में उतारा।
अप्रैल 2005 में मारुति की 50 लाखवीं कार तैयार हुई। मारुति ने अपने इस सफर में कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी जीते। इनमें बिक्री बाद ग्राहकों को संतोषजनक सेवा देने का पुरस्कार उसे 2008 में लगातार नौंवी बार मिला। जुलाई 07 में मारुति उद्योग लिमिटेड का नाम बदलकर मारुति सुजूकी इंडिया लिमिटेड कर दिया गया। पच्चीस साल के इस सफर में मारुति ने उपभोक्ताओं की पंसद के लिए इतने माडल उतार दिए हैं कि शोरुम में जाकर इनकी चकाचौंध में ग्राहक सोचता रह जाता है। इनमें मारुति 800 आल्टो, जेन, वैगन आर, वरसा, स्विफ्ट, स्विफ्ट डिजायर, एसएक्स फोर और हाल ही में पेश ए स्टार प्रमुख हैं।
जवां ब्रांड हो गया मारुति
>> 14 दिसंबर 1983 को मारुति ने लोकप्रिय छोटी कार 786 सीसी की मारुति 800 को बाजार में पेश किया था।
>> पच्चीस वर्ष का लंबा सफर तय करने के बाद भी मारुति ब्रांड की लोकप्रियता में आज भी कोई कमी नजर नहीं आ रही है।
>> कंपनी ने लोगों की पसन्द के अनुरूप माडलों को बाजार में उतारने के लिए निरंतर अनुसंधान पर जोर दिया और इसके परिणामस्वरुप 1993 में 993 सीसी वर्ग में जेन माडल उतारा गया।