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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. गर्भाशय के कैंसर के केस मध्यप्रदेश ही नहीं वरन पूरे देश में तेजी से बढ़ रहे हैं। हर साल एक लाख 30 हजार नए रोगियों का पता चलता है। इनमें से 80 हजार महिलाओं की मौत हर साल इस बीमारी से हो जाती हैं। उक्त जानकारी दिल्ली से आए वरिष्ठ चिकित्सक डा.बीसी दास ने दी।
वे, शनिवार को होटल सेंट्रल पार्क में गजराराजा मेडिकल कॉलेज (जीआरएमसी) के पैथोलॉजी एवं माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) में व्याख्यान दे रहे थे। डा.दास ने कहा कि ह्यूमन पैपेलोमा वायरस(एचपीवी) वैक्सीन लेने से महिलाएं गर्भाशय के कैंसर से बच सकती हैं। गर्भाशय के कैंसर का कारण कम उम्र में शादी एवं अधिक बच्चे होना है।
लखनऊ से आए डा.एस अग्रवाल ने जैनेटिक डिसआर्डर पर व्याख्यान देते हुए बताया कि जैनेटिक डिसआर्डर तीन प्रकार के होते हैं जिनमें क्रोमासोम, सिंगल जीन के डिसआर्डर, पॉलीजनिक डिसआर्डर प्रमुख हैं। इसके कारण जन्मजात विकृति होती है। जैनेटिक डिसआर्डर के कारण मंदबुद्धि होने के साथ-साथ शरीर के किसी भी अंग में बीमारी हो सकती है।
सीएमई में पद्मश्री डा.एमजी देव ने स्टेम सेल्स पर व्याख्यान देते हुए कहा कि बोनमेरो के ट्रांसप्लांट में स्टेम सेल्स बेहतर जरूरी है। नवी मुंबई से आए डा.नवीन खत्री ने बोनमेरो ट्रांसप्लांट , एम्स से आए डा.पार्थो चट्टोपाध्याय ने मोलीक्यूलर ओंकोलोनी पर, एम्स के ही डा.सरनाम सिंह ने क्षय रोग में दवाओं की प्रतिरोधक क्षमता पर क्लीनिकल एवं सैद्धांतिक प्रयोग पर, डा.निहाल रंजन राना ने दिमागी बीमारियों से संबंधित उपचार पर व्याख्यान दिया।
‘सीएमई के आयोजन समय की मांग’
सुबह ‘मोलीक्यूलर एवं सेल्यूलर मेडिसिन’पर आयोजित सीएमई का उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि वरिष्ठ चिकित्सक डा. सरला श्रीवास्तव ने कहा कि सीएमई का आयोजन होते रहना चाहिए, क्योंकि इससे चिकित्सा क्षेत्र में आ रहे बदलाव की जानकारी मिलती है। सीएमई आज के समय की मांग है। जीआरएमसी की प्रभारी डीन डा.ए.मेहरोत्रा ने भी विचार व्यक्त किए। स्वागत भाषण पैथोलॉजी के विभागाध्यक्ष डा.भरत जैन ने दिया। संचालन डा.केएस मंगल ने तथा आभार शशि गांधी ने व्यक्त किया।
रिसर्च को दिया जाए बढ़ावा : डा.देव
पद्मश्री डा.एमजी देव का कहना है कि विभिन्न बीमारियों के उपचार के लिए रिसर्च को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने आयोडीनयुक्त नमक और एंटीलैप्रेसी वैक्सीन की खोज में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था,जिसके लिए भारत सरकार ने उन्हें 1992 में पद्मश्री से सम्मानित किया।