नई दिल्ली भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की गलतियों के कारण 60 हजार टन से भी अधिक गेहूं व चावल सड़ गया है। स्थिति इतनी खराब है कि इस सड़े गेहूं-चावल को पशुओं तक को भी नहीं खिलाया जा सकता है। यह हाल तब है कि जब देश के कई पिछड़े इलाकों में भुखमरी की खबरें आम घटना हैं।
एफसीआई ने रख-रखाव के अभाव में खाद्यान्नों की हुई बर्बादी को स्वीकार भी किया है। केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय की सचिव अलका सिरोही की अध्यक्षता में हुई बैठक में एफसीआई के अधिकारियों ने बताया कि इस वक्त उनके गोदामों में करीब 92 लाख टन गेहूं व चावल का भंडार है।
इसमें करीब 41 हजार टन गेहूं ऐसा है जो दो साल से ज्यादा पुराना है और करीब पांच टन गेहूं ऐसा है, जो पांच साल से ज्यादा पुराना है। करीब 91 लाख टन गेहूं का भंडारण पिछले दो साल में किया गया है।
रेलवे के सिर फोड़ा ठीकरा
एफसीआई के अनुसार, वर्ष 2007-08 में 285 लाख टन चावल व 111 लाख टन गेहूं खरीदा गया था। इसमें सबसे ज्यादा खरीद हरियाणा व पंजाब में हुई थी। इन दोनों राज्यों में गोदामों की क्षमता से अधिक खरीद होने के कारण खाद्यान्न का खुले में रखा गया था।
साथ ही समय पर रेल रैक नहीं मिलने के कारण इसे दूसरे राज्यों में नहीं भेजा जा सका था। पिछले दो साल से खुले में अनाज रखने के कारण करीब 10 हजार टन से अधिक गेहूं में अंकुरण शुरू हो गया था।
क्षमता से अधिक खरीद
केंद्र सरकार की अनाज भंडारण की दो संस्थाएं एफसीआई व सैंट्रल वेयर हाउसिंग कारपोरेशन दोनों के देशभर में फैले गोदामों में करीब 300 लाख टन गेहूं भंडारण की क्षमता है। इस भंडारण की क्षमता में पिछले तीन साल में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं हुई है। जबकि पिछले तीन वर्ष से सरकारी खरीद 330 लाख टन से अधिक की हो रही है।