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सौ रुपए में लाखों की रजिस्ट्री

इंदौर. registry शहर के भूमाफिया महज 100 रुपए के स्टाम्प में रजिस्ट्री करवाकर लाखों रुपए का फायदा उठा रहे हैं। भूमाफिया और रजिस्ट्रार ऑफिस के अफसरों की मिलीभगत से यह खेल सालों से चल रहा है। ये लोग कम मूल्य के स्टाम्प पर जमीन, मकान या फ्लैट की रजिस्ट्री पेश कर क्रेता-विक्रेता से हस्ताक्षर ले लेते हैं और पूरे स्टाम्प अदा करने का कहकर इसे पेंडिंग कर दिया जाता था।

नया सौदा होने पर पुरानी गाइड लाइन के हिसाब से पूरी स्टाम्प डच्यूटी चुका दी जाती है। डीबी स्टार ने मामले की पड़ताल की तो ऐसी कई रजिस्ट्रियां सामने आईं, जो सालों से पेंडिंग पड़ी हुई हैं। अब जिम्मेदार आला अफसर अपने अधीनस्थों को बचाने में लगे हुए हैं।

सारे मामले की शिकायत भोपाल स्थित आईजी रजिस्ट्रेशन तक भी पहुंची। इस संबंध में भोपाल से आए डीआईजी इंद्रजीत जैन ने जांच की और उन्होंने अफसरों को एक सप्ताह के भीतर सारी पेंडिंग रजिस्ट्रियां पेश करने का निर्देश जारी किया।

जैन ने हिदायत दी कि या तो सभी रजिस्ट्रियों की कागजी कार्रवाई पूरी करें या फिर उन्हें कैंसल कर दें। इसके बाद इंदौर कार्यालय के वरिष्ठ रजिस्ट्रार डॉ. श्रीकांत पांडे ने भी सख्त निर्देश दिए हैं। दरअसल, यह काम नियमों को लचीला बनाकर किया जाता था। इसके लिए रजिस्ट्री को पेंडिंग रखने वाले अफसर को भी कुल रकम का 30 से 40 प्रतिशत तक दिया जाता था। मामले पर डॉ. पांडे से पूछा गया तो वे अपने अफसरों और भूमाफियाओं के बीच किसी भी तरह की मिलीभगत से इंकार कर रहे हैं।

पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए तो बॉम्बे हॉस्पिटल के आसपास, रिंगरोड, योजना क्रमांक 114, वसंत विहार, हेमिल्टन रोड, शिवविलास पैलेस, एमजी रोड, खजूरी बाजार, सांघी कॉलोनी, गुलमोहर कॉलोनी जैसे क्षेत्रों की रजिस्ट्रियां मिलीं, जो सालों से रजिस्ट्रार ऑफिस में ही धूल खा रही हैं। रजिस्ट्री पेश करते समय क्रेता-विक्रेता के हस्ताक्षर के बाद कार्यालय में अंगूठा लगाना होता है। नियमानुसार जिस दिन इसे पेश किया जाता है, उसी दिन की गाइड लाइन के हिसाब से स्टाम्प डच्यूटी लगाई जाएगी।

इसी नियम का फायदा उठाकर कई भूमाफियाओं ने अफसरों के सामने 100 रुपए में ही लाखों रुपए की रजिस्ट्री पेश कर दी और अधिकारियों ने इसमें कमी बताकर उसे पेंडिंग बताया। सालों बाद जब संबंधित पक्षों को रजिस्ट्री की जरूरत पड़ी तो उन्होंने जिस समय इसे पेश किया था, उस साल की गाइड लाइन देकर लाखों रुपए बचा लिए।

पुरानी गाइड लाइन से कई गुना फायदा
यदि 2006 में किसी ने एक करोड़ की रजिस्ट्री पेश की। इस पर कुल स्टाम्प ड्यूटी 10 प्रतिशत लगना थी, जो उस समय की गाइड लाइन के हिसाब से करीब 10 लाख रुपए होती है। इसे तीन साल बाद लिया गया, जबकि वर्तमान गाइड लाइन में तीन गुना की बढ़ोतरी हो चुकी थी। इस हिसाब से 20 लाख रुपए का सीधा-सीधा फायदा हुआ, जो भूमाफिया और रजिस्ट्रार ऑफिस के अफसरों की जेब में जाता है।

जांच में मिली थीं पेंडिंग रजिस्ट्रियां
इंदौर रजिस्ट्रार कार्यालय की जांच में कई रजिस्ट्रियां पेंडिंग मिली थीं, मतलब उसी दिन की रजिस्ट्री उसी दिन में नहीं थी। इसलिए मैंने आईजी के निर्देशानुसार अब किसी भी रजिस्ट्री को एक सप्ताह से ज्यादा पेंडिंग नहीं रखने के वरिष्ठ रजिस्ट्रार को निर्देश दिए हैं। इससे ज्यादा मैं आपको नहीं बता सकता।
-इंद्रजीत जैन, डीआईजी, रजिस्ट्रार कार्यालय भोपाल

अब ऐसा नहीं होगा
वरिष्ठ रजिस्ट्रार डॉ. श्रीकांत पांडे से सीधी बात

>> क्या इंदौर रजिस्ट्रार कार्यालय में डीआईजी ने जांच की थी?
हां, वे यहां जांच करने आए थे।
>> आपने तुरंत आदेश निकाला था?
कोई भी रजिस्ट्री एक सप्ताह से ज्यादा पेंडिंग नहीं रहेगी। यह आईजी व डीआईजी के निर्देश पर किया।
>> अफसरों की मिलीभगत से सालों तक रजिस्ट्रियां पेंडिंग रहती हैं?
सामान्यत: ऐसा नहीं होता। विशेष परिस्थियों में कुछ मामले निपटाने में जरूर कुछ साल लग जाते हैं।
>> इसके लिए आपके अफसर जिम्मेदार हैं?
नहीं। यदि इस बात का कोई सबूत पेश करे तो जरूर कार्रवाई करेंगे।
>> सालों तक रजिस्ट्रियां पेंडिंग कर लोग पुरानी गाइड लाइन का फायदा लेते हैं?
अब यह नहीं होगा।





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