जालंधर पंजाब यूथ कांग्रेस के चुनाव में कांग्रेस के छोटे सिपाहियों ने ‘अपना वजूद’ दिखा कर पूर्व मंत्रियों व वरिष्ठ कांग्रेसियों को झटका दे डाला है। अपने इशारों पर यूथ कांग्रेस को नचाने की क्षमता रखने वाले दिग्गज अब अपने अस्तित्व को लेकर ही सोच में डूबे हुए हैं।
पंजाब यूथ कांग्रेस के ब्लॉक स्तरीय चुनाव में मनपसंद ब्लॉक प्रधान व डैलीगेट इलैक्ट करवा कर यूथ कांग्रेसियों ने साबित कर दिया है कि वे चुनाव लड़ने, लड़वाने और जीतने की क्षमता रखते हैं। चाहे इस चुनाव में वोटिंग प्रतिशत काफी कम रहा, लेकिन यूथ कांग्रेस की इन्हीं कुछ खूबियों ने उन वरिष्ठ कांग्रेसियों को चिंता में डाला है जो इन्हीं युवाओं के सहारे चुनाव जीतते थे।
कांग्रेसी पार्षद दिनेश ढल्ल काली, पंजाब यूथ कांग्रेस के पूर्व महासचिव मौंटी सहगल व जिला यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रिंकू सेठी अपने-अपने लक्ष्य को हासिल करने में सफल रहे हैं। काली के अधिकतर ब्लॉक प्रधान अपने खेमे से बनवाए तो मौंटी व रिंकू सेठी के 70-70 से ज्यादा डैलीगेट्स के दावों ने साबित कर दिया है कि अब उन्हें ‘हल्के में न लिया जाए’।
अभी तो ब्लॉक प्रधानों एवं डैलीगेट्स के ही चुनाव थे, लेकिन इसके बाद डिस्ट्रिक्ट और स्टेट लैवल के चुनाव भी होने हैं। स्टेट प्रैसीडैंट इलैक्ट करने की प्रक्रिया के पूर्ण होते होते यूथ कांग्रेसी भी चुनावी रणनीति और चुनावी बिसात बिछाने के माहिर हो जाएंगे।
संसदीय चुनाव के करीबह ढ़ाई वर्ष बाद विधानसभा चुनाव होंगे, तब संभव है कि इन्हीं ‘छोटे सिपाहियों’ में से कोई खुद को उम्मीदवार के तौर पर पेश कर दे। यही सोच पूर्व कैबिनेट मंत्रियों को भी खासा परेशान कर रही है।