आमदनी अठन्नी, खर्च रुपैया। इस समस्या से कई लोग पीड़ित हैं और इसकी जड़ में है मनी मैनेजमेंट का अभाव। यानी कमाई और खर्च में संतुलन साधने की कला में सिद्धस्थ न होना। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर व्यक्ति को कॉलेज पहुंचने तक पैसे का प्रबंधन करना सिखा दिया जाए तो इस समस्या से काफी हद तक निपटा जा सकता है।
अमेरिका स्थित ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी ने अपने सभी विद्यार्थियों के स्व-अध्ययन के लिए मनी मैनेजमेंट पाठच्यक्रम तैयार किया है जिसमें आमदनी व खर्च के प्रबंधन के गुर सिखाए गए हैं। इस पाठ्यक्रम में छह अध्याय हैं जिनमें छह सवाल उठाते हुए उनका जवाब दिया गया है। ये अध्याय हर उस व्यक्ति के लिए मददगार हो सकते हैं जो पैसे के कुप्रबंधन की समस्या से ग्रस्त है। मुद्रास्फीति व मंदी जैसी स्थिति में तो ये और भी प्रासंगिक हैं।
अध्याय 1:
क्या आप रुपए-पैसे के बारे में अपने करीबी परिजनों से बात करते हैं? यदि नहीं तो ऐसा करना अभी से शुरू कर दीजिए। इससे भविष्य के कुछ वित्तीय लक्ष्य तय करने में मदद मिलेगी। अगर लक्ष्य ही तय नहीं होंगे तो तब न तो पैसा बचेगा और न ही उसका सही ढंग से उपयोग हो सकेगा।
अध्याय 2:
क्या कभी आपने यह जानने का प्रयास किया है कि आपका पैसा कहां जाता है? कुछ हिसाब तो बहुत सीधे-से हैं- मकान किराया या होम लोन की किस्त, किराने का सामान, बिजली, मोबाइल के बिल, दूध इत्यादि। लेकिन आपके वेतन का एक बड़ा हिस्सा कहां चला जाता, पता ही नहीं चल पाता।
कई लोग जानने की मशक्कत भी नहीं करते। लेकिन पैसे का प्रबंध करना है तो माह के अंत में इसका हिसाब लगाइए। पता चलेगा कि बहुत-सा खर्च यूं ही हो गया। अब अगले महीने की प्लानिंग कीजिए और इन ‘यूं ही’ खर्चो पर लगाम लगाइए। हिसाब-किताब के लिए कागज-पेन का इस्तेमाल करने में संकोच कैसा?
अध्याय 3:
क्या आपने खर्च करने की आदतों का आकलन किया है? खरीददारी करने जाते हैं तो क्या आप घर से सूची बनाकर ले जाते हैं? बेहतर होगा कि हर खरीददारी पर जाने से पहले एक सूची बनाएं और उसी के अनुरूप खरीदी करें। जो बहुत जरूरी नहीं है, उनकी खरीदी अगले माह के लिए टाल दीजिए। टालने की यह आदत कम से कम बचत के मामले में बहुत कारगर साबित होती है।
अध्याय 4:
क्या आप बहुत लोन लेते हैं या लोन लेने से घबराते हैं? दोनों स्थिति अच्छी नहीं है। लोन दुधारी तलवार के समान है। लोन से आप ऐसी चीजें खरीद सकते हैं जो नकदी में आपके लिए कभी संभव ही नहीं होगा। इस प्रकार उचित ढंग से लिया गया लोन बचत का भी काम करता है, क्योंकि आपको एक निश्चित राशि किस्त चुकाने के लिए रखनी पड़ती है। लेकिन खबरदार! इतना अधिक लोन भी नहीं लें कि उसे चुकाने के लिए दूसरा लोन लेना पड़े।
अध्याय 5:
क्या आप दीर्घावधि व अल्पावधि के खचरें का बजट बनाते हैं? खुद अपने बैंकर बनें। अल्पावधि के खर्च के लिए स्वयं को पैसे जारी करें ताकि उसके प्रति उत्तरदायित्व बोध बना रहें। दीर्घावधि के खर्च की राशि अपने बैंक अकाउंट में रखकर भूल जाएं। इससे दीर्घावधि के खर्च के लिए पैसे जुटाने की चिंता से आप मुक्त रहेंगे और बैंक में राशि रहने से ब्याज के रूप में कुछ न कुछ रिटर्न भी मिलता रहेगा।
अध्याय 6:
क्या आप निवेश भी करते हैं? अगर आपने पैसा बचाना सीख लिया है तो अब निवेश करना भी सीखिए। अपने पास रखे अतिरिक्त पैसे का हिसाब लगाएं, कुछ जरूरी बीमा पॉलिसी खरीदें और जितना संभव हो, सुरक्षित निवेश में पैसा लगाएं। अपने वित्तीय रिकार्ड की जानकारी भी एकदम दुरुस्त रखें।
स्रोत : ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट