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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में आपरेशन कराना है, तो सामान खुद लाना होगा। आंबेडकर अस्पताल की ओटी में दस्ताने और मास्क खत्म हो चुके हैं। मरीज की ड्रेसिंग के लिए धागा-पट्टी और हाथ धोने के लिए साबुन तक खत्म हो गया है। एंटीबायोटिक के जरूरी इंजेक्शन और दवाओं का भी टोटा बना हुआ है। इन्हें बाहर से मंगवाना पड़ रहा है।
गुरुवार रात एक मासूम बच्चे की अंतड़ी के इमरजेंसी आपरेशन पर हंगामा हो गया। कुशालपुर के अरुण (12) की अंतड़ी का आपरेशन होना था। डाक्टरों ने आपरेशन की तैयारियां शुरू की और उसे ओटी में लिटा दिया। ओटी का सामान खंगाला गया तो ग्लव्स और मास्क तक नहीं मिले। साबुन भी नहीं था और ड्रेसिंग के लिए धागा तक नदारद था।
एक डाक्टर ने दूसरी ओटी से धागा और साबुन जुगाड़ लिया। ग्लव्स और मास्क खरीदने के लिए मरीज के परिजनों को कहा गया, तो वे भड़क उठे। उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। सामान की कमी के कारण सुबह से कई सामान्य आपरेशन टाले जा चुके थे। बिना सामान के आपरेशन भी नहीं किया जा सकता था। आचार संहिता की वजह से 14 अक्टूबर से सारी खरीदी बंद हो गई थी। जानकारों के मुताबिक अस्पताल प्रशासन को दिसंबर तक का भरपूर स्टाक पहले से जमा रखना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। लोकल खरीदी महंगी पड़ रही है, इसलिए यह भी आम मरीजों के लिए बंद कर दी गई।
मरीज से मंगवाया सामान
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक ओटी में खरोरा के विश्वनाथ साहू के पैरों में राड डालने के लिए आपरेशन की तैयारी की गई। उसे ओटी ले जाया गया। डाक्टरों ने सारी तैयारियां कीं और ड्रेसिंग मटेरियल खत्म बताकर मरीज को ही लाने कह दिया। यह सुनकर मरीज नाराज हो गया। बाद में उसके परिजनों से करीब 800 रुपए का ड्रेसिंग मटेरियल, ग्लव्स व एक दर्द का इंजेक्शन मंगवाया गया, तब जाकर आपरेशन स्टार्ट हुआ।
हर रोज डेढ़ दर्जन आपरेशन
अस्पताल में नियमित और इमरजेंसी मिलाकर हर रोज दो दर्जन से ज्यादा आपरेशन होते हैं। सबसे ज्यादा आपरेशन ट्रामा यूनिट, गायनिकोलाजी, न्यूरो और सर्जरी विभाग की ओटी में किए जाते हैं, तीनों ही जगह सामान खत्म हो चुका है। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक कुछ स्टाक इमरजेंसी के लिए रखा गया है, जिन्हें खास सिफारिशों पर निकाला जा रहा है।
डाक्टरों में जबर्दस्त नाराजगी
आपरेशन थिएटरों में ड्यूटी करने वाले डाक्टरों के साथ हर दिन मरीज और उनके परिवारों का झगड़ा हो रहा है। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक यह डाक्टरों की मजबूरी है कि उन्हें आपरेशन के लिए मरीजों से ही सामान मंगवाना पड़ रहा है। डाक्टरों ने कई बार अस्पताल प्रबंधन से इसकी शिकायतें कीं, लेकिन इस बारे में कोई भी ध्यान नहीं दे रहा। डाक्टरों ने चेतावनी दी है कि प्रबंधन का अगर यही रवैया रहा तो वे आपरेशन बंद कर देंगे।