रांची.
यह खबर जानवरों से प्यार करनेवालों को दुखी कर सकती है। एक आधिकारिक सर्वे के अनुसार भारत में अब केवल 1500 बाघ बचे हैं। 2001-02 में हुए सर्वे के अनुसार भारत में बाघों की संख्या 3652 थी और यदि इसी रफ्तार से बाघों की संख्या कम होने लगी तो एक दिन म्यूजियम में बाघों की खाल देखकर ही संतोष करना होगा। स्टेटस ऑफ टाइगर्स, कोप्रीडेटर्स एंड प्रे इन इंडिया नामक इस सर्वे को पर्यावरण व वन मंत्रालय के देहरादून स्थित नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी ने करवाया है।
- बाघों की संख्या कम होने का प्रमुख कारण बाघों का शिकार और वनों का खत्म होना है।
- तकरीबन एक शताब्दी पूर्व बाघों की संख्या 40000 थी।
- पिछले छह सालों में 60 प्रतिशत कम हो गई है।
रिपोर्ट के अनुसार बाघों की जनसंख्या को चार भागों में गिना गया है।
- शिवालिक गंगा क्षेत्र (उत्तराखंड, उ.प्र., बिहार) में 297 बाघ (सर्वाधिक उत्तराखंड - 178)
- मध्यभारत क्षेत्र (आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़, म.प्र., महाराष्ट्र, उड़ीसा, राजस्थान और झारखंड) में 601 बाघ (सर्वाधिक मध्यप्रदेश- 300)
- पश्चिम घाट क्षेत्र (केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु) में 402 बाघ (सर्वाधिक कर्नाटक- 290)
- उत्तर-पूर्व (असम, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, पश्चिम बंगाल) में 200 बाघ
वैज्ञानिक तरीके से तैयार किए आंकड़े
सर्वे के दौरान झारखंड और सुंदरबन के बाघों की संख्या राज्य द्वारा प्रोटोकॉल के अनुसार नहीं दी गई। अब तक बाघों की संख्या उनके पंजो के निशान को पहचान विशेषज्ञों की मदद से गिनी जाती थी। इस सर्वे में आंकड़े विशेष वैज्ञानिक पद्धति द्वारा इक्ट्ठा किए गए हैं। खास जीपीएस सिस्टम, ग्राफिकल इंफॉर्मेशन सिस्टम, कैमरा, मॉनिटर की मदद से एकत्रित डाटा द्वारा यह जनसंख्या पता की गई है।