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International International न्यूयार्क.
मुंबई आतंकी हमलों के संबंध में पाकिस्तान को ‘बेचारा’ साबित करने की कोशिश करते हुए राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा है कि भारत को समझना चाहिए कि हमले के बाद पैदा हुई परिस्थिति में असल नुकसान पाकिस्तान व इसकी अवाम का ही हुआ है। उन्होंने कहा कि उनके देश ने भारत के साथ अच्छे संबंध बनाने की अनेक कोशिशें की हैं।
जरदारी के अनुसार, आतंकवाद के खिलाफ तेजी से कदम उठाने के लिए पाकिस्तान को समय रहते खुफिया सूचना मिलना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग मुंबई हमले की पूर्व जानकारी होने की बात कर रहे हैं, उन्होंने पाकिस्तान को यह सूचना कभी भी नहीं दी।
‘न्यूजवीक’ मैग्जीन को दिए इंटरव्यू में जरदारी ने कहा, ‘मैंने सुना है कि रूसियों ने भारतीयों को सूचना (मुंबई हमलों के बारे में) दी थी। काश उन्होंने यही जानकारी हमें भी दी होती।’ जब उनसे पूछा गया कि मुंबई पर हमला करने वाले आतंकियों का संबंध पाकिस्तान से स्थापित होने के बाद क्या वे कार्रवाई करेंगे तो उन्होंने कहा, ‘जरूर, उनके लिए नहीं, खुद के लिए करूंगा।’
आईएसआई-लश्कर संबंध नहीं : जरदारी ने इस बात को नकार दिया कि आईएसआई का लश्करे तैयबा के साथ अब भी कोई संबंध है। उन्होंने कहा, ‘ये संबंध उस वक्त थे जब देश में तानाशाह राज करते थे। शायद यह स्थिति 9/11 (अमेरिका में हमले) से पहले की थी, लेकिन उसके बाद चीजें बहुत हद तक बदल गई हैं।’
सुरक्षा परिषद के निर्णय को चुनौती दे सकते हैं आतंकी : संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के राजदूत हुसैन हारून ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा आतंकी घोषित किए गए लश्करे तैयबा के तीन नेता इस निर्णय के खिलाफ सीधे या पाक सरकार के जरिये अपील कर सकते हैं।
हारून ने शनिवार को यहां पत्रकारों से कहा कि जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद और मुंबई आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड व लश्कर के आपरेशनल कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी के लिए यह अंत नहीं है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की समिति ने जिन लोगों को आतंकी घोषित किया है उनमें लश्कर का मुहम्मद अशरफ और जकी-उर-बहाजिक भी शामिल है।