नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने चैक बाउंस होने के मामलों में दिशा-निर्देश तय किए हैं। नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, चैक बाउंस होने का मामला जिस निचली कोर्ट के क्षेत्राधिकार में हुआ है उसी कोर्ट में तत्संबंधी मुकदमा चलेगा।
शीर्ष कोर्ट के मुताबिक, वित्तीय संस्थानों और बैंकों समेत तमाम शिकायत करने वालों को चैक बाउंस होने का मामला दायर करते समय यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आरोपी को असुविधा नहीं हो। ऐसे कई उदाहरण हैं जब शिकायतकर्ता आरोपी को परेशान करने के लिए एक से अधिक जगह पर शिकायत दर्ज कराते हैं। जस्टिस एसबी सिन्हा नीत बेंच ने ये विचार निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 के तहत एक कोर्ट के क्षेत्राधिकार को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई करते समय जताए।
क्या था मामला : यह मामला हरमन इलेक्ट्रॉनिक्स तथा नेशनल पेनासॉनिक इंडिया (एनपीआई) के बीच चंडीगढ़ में हुए लेन-देन से संबंधित है। इसमें प्रथम पक्ष द्वारा दूसरे पक्ष को दिया गया चेक चंडीगढ़ में बाउंस हो गया था। इस पर एनपीआई ने हरमन को नोटिस जारी करने के बाद दिल्ली में शिकायत दर्ज कराई कि वह पांच लाख रुपए अदा करे। ऐसे में हरमन ने इस मामले में नई दिल्ली के अतिरिक्त सेशन कोर्ट के क्षेत्राधिकार को चुनौती दी।
निचली अदालत का कहना था कि वह आवेदन स्वीकार सकती है क्योंकि आरोपी को नोटिस दिल्ली से भेजा गया था और शिकायतकर्ता का दिल्ली में पंजीकृत कार्यालय भी है। बाद में शीर्ष कोर्ट ने कंपनी के पक्ष में फैसला करते हुए कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट को इस मामले की सुनवाई का हक नहीं है। इसका सक्षम कोर्ट के क्षेत्राधिकार में हस्तांतरण होना चाहिए।
नए दिशा-निर्देशों पर एक नजर
- चैक बाउंस होने का जुर्म जिस निचली कोर्ट के क्षेत्राधिकार में हुआ हो उसी कोर्ट में चले मुकदमा
- मामला दायर करते समय यह सुनिश्चित किया जाए कि आरोपी को नहीं हो असुविधा।